छोटे बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, देखभाल और पोषण को एकीकृत एवं मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों को एक ही परिसर में संचालित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित, सहज और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है।
जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा ‘मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0’ के विज़न को धरातल पर लागू करने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा यह को-लोकेशन मॉडल अपनाया जा रहा है। इसके तहत आंगनवाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों को एक साथ संचालित कर बच्चों की शिक्षा और पोषण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
इस व्यवस्था में उन आंगनवाड़ी केंद्रों को प्राथमिक विद्यालय परिसरों में स्थानांतरित किया जा रहा है, जो उनके समीप स्थित हैं और जहां बच्चों की सुरक्षित पहुंच संभव है। अतिरिक्त कक्षों वाले विद्यालयों में आंगनवाड़ी केंद्रों को समायोजित कर शासकीय संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। वहीं, जहां भौगोलिक कारणों से को-लोकेशन संभव नहीं है, वहां डिजिटल मैपिंग के माध्यम से दोनों संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार इस मॉडल से बच्चों का आंगनवाड़ी से कक्षा एक में प्रवेश अधिक सहज होगा और स्कूल परिसर से परिचित होने के कारण उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। इससे प्रारंभिक कक्षाओं में ड्रॉपआउट दर में कमी आने की संभावना है। साथ ही बच्चों को विद्यालयों की अधोसंरचना, खेल मैदान और शैक्षणिक संसाधनों का समान लाभ मिलेगा।
इस एकीकृत व्यवस्था से बच्चों की उपस्थिति में सुधार, शैक्षणिक गुणवत्ता में वृद्धि तथा ‘आधारशिला’ और ‘जादुई पिटारा’ जैसे खेल-आधारित पाठ्यक्रमों के बेहतर उपयोग की संभावना भी बढ़ेगी। इसके अलावा आंगनवाड़ी और विद्यालयों के बीच डेटा समन्वय आसान होने से योजनाओं का दोहराव रुकेगा और प्रत्येक बच्चे तक सरकारी लाभ समय पर पहुंच सकेगा।
इस मॉडल के तहत ‘विद्यारंभ’ कार्यक्रम को एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिसके अंतर्गत बच्चों की औपचारिक शिक्षा यात्रा की शुरुआत को चिह्नित किया गया। हाल ही में प्रदेश के 94 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में एक साथ विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लाखों बच्चों को उनकी प्रारंभिक शिक्षा की शुरुआत का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।
प्रदेश में राज्य, जिला, परियोजना, सेक्टर और आंगनवाड़ी स्तर पर हजारों कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी रही। इसके साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पात्र बच्चों की सूची तैयार कर आगामी सत्र में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।






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