इस्लामाबाद, 19 मई।
पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत में आजादी समर्थक विद्रोहियों के प्रमुख संगठन बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने क्वेटा-ताफ्तान राजमार्ग (एम-40) पर पूर्ण नियंत्रण का दावा किया है। सात दिन की कठिन लड़ाई के बाद समूह ने कहा कि अब यह राजमार्ग पूरी तरह उनके कब्जे में है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के सुरक्षा बलों के साथ हिंसक टकराव का सामना किया।
बीएलए ने बताया कि 10 से 17 मई के बीच यह राजमार्ग अत्यंत अस्थिर और संवेदनशील रहा। इस दौरान मस्तुंग, नुश्की, दलबांदिन, खारान और वाशुक के विभिन्न इलाकों में गोलीबारी और विस्फोट होते रहे। 15 मई को मस्तुंग जिले के नुश्की के पास शेख वासिल इलाके में एक महत्वपूर्ण पुल को धमाके से उड़ा दिया गया। उसी दिन खनिजों की ढुलाई करने वाले काफिले और पाकिस्तानी सेना की टुकड़ियों को निशाना बनाया गया।
खारान के अरमागये इलाके में खनिज ढुलाई करने वाले ट्रकों को आग के हवाले किया गया। वाशुक के बासीमा में पाकिस्तान सेना के लिए राशन ले जाने वाले वाहन को जब्त किया गया। बीएलए ने शहर के कई हिस्सों पर कब्जा किया और इस राजमार्ग पर सेना के एक वाहन को विस्फोट कर उड़ा दिया। संगठन ने कहा कि यह रास्ता अब पूरी तरह उनके नियंत्रण में है और यह बलोचिस्तान संसाधनों के शोषण के लिए इस्तेमाल होने वाला अहम गलियारा रहा है।
क्वेटा-ताफ्तान राजमार्ग पाकिस्तान के लिए विशेष महत्व रखता है। यह बलोचिस्तान की राजधानी क्वेटा को ईरान सीमा से लगे ताफ्तान शहर से जोड़ता है और ईरान के माध्यम से पाकिस्तान को तुर्की और यूरोप से जोड़ता है। यह मार्ग क्षेत्रीय सहयोग विकास (आरसीडी) राजमार्ग का हिस्सा भी है और ईरान-पाकिस्तान व्यापार एवं पारगमन का प्रमुख जमीनी मार्ग माना जाता है। यह राजमार्ग खनन परियोजनाओं के कर्मचारियों और मध्य पूर्व-यूरोप जाने वाले यात्रियों के लिए मुख्य पारगमन मार्ग है। प्रांतीय प्रशासन रात में यात्रा पर प्रतिबंध लगाता रहता है।
क्वेटा और पेशावर के बीच चलने वाली जाफर एक्सप्रेस लगातार दूसरे दिन भी रद रही। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन आज भी रवाना नहीं होगी और इसे जैकबाबाद से वापस लौटाया गया। ट्रेन के संचालन को फिर से शुरू करने का निर्णय हालात की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।






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