भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने कहा है कि 22 मई शुक्रवार को हिन्दू समाज स्वाभिमान और सम्मान के साथ भोजशाला में माँ सरस्वती का पूजन-अर्चन करेगा और महाआरती आयोजित की जाएगी। उन्होंने इसे ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि 721 वर्षों बाद इस प्रकार से पूजा करने का अवसर प्राप्त हो रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि दोपहर 12 बजे धान मंडी चौराहे से सकल हिन्दू समाज सामूहिक रूप से भोजशाला के लिए प्रस्थान करेगा, जिसके बाद दोपहर 1 बजे भोजशाला परिसर में महाआरती का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में भोजशाला आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता भी शामिल रहेंगे।
अशोक जैन ने दावा किया कि राजा भोज द्वारा निर्मित माँ सरस्वती मंदिर भोजशाला पर वर्ष 1305 में मुगल शासक अलाउद्दीन खिलजी के समय कब्जा होने के बाद से हिन्दू समाज पूजा-अर्चना के अधिकार के लिए संघर्ष करता रहा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से आंदोलन और प्रयास किए जाते रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 1997 में शुरू हुए आंदोलन को हाल ही में महत्वपूर्ण सफलता मिली है और उनके अनुसार 15 मई 2026 के न्यायालयीन निर्णय के बाद स्थिति में परिवर्तन आया है। इसके बाद परिसर को अब “भोजशाला” नाम से संबोधित किए जाने की बात भी उन्होंने कही।
उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की कानूनी बाधा नहीं आती है तो 22 मई को हिन्दू समाज पहली बार शुक्रवार के दिन भोजशाला में निर्बाध रूप से पूजन-अर्चन और महाआरती करेगा, जिसे उन्होंने स्वाभिमान और गौरव से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षण बताया।












