15 मई।
मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने फर्जी विश्वविद्यालयों और अवैध शिक्षण संस्थानों के बढ़ते जाल से विद्यार्थियों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देशों के अनुरूप राज्यभर में व्यापक जनजागरूकता अभियान प्रारंभ किया है। इस अभियान के तहत सभी शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों, शासकीय और अशासकीय महाविद्यालयों सहित समस्त शैक्षणिक संस्थानों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि विद्यार्थियों को सही जानकारी उपलब्ध कराई जा सके।
जनसंपर्क अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान प्रवेश सत्र को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शैक्षणिक संस्थानों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी है। आयोग के अनुसार कुछ संस्थान स्वयं को विश्वविद्यालय या उच्च शिक्षण संस्थान के रूप में प्रस्तुत कर आकर्षक विज्ञापनों और भ्रामक दावों के माध्यम से विद्यार्थियों को गुमराह कर रहे हैं, ऐसे में इन संस्थानों से प्राप्त डिग्रियां न तो उच्च शिक्षा में मान्य होंगी और न ही रोजगार के लिए उपयोगी मानी जाएंगी।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की 18 मार्च की सार्वजनिक सूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि केवल विधिवत मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय और संस्थान ही डिग्री प्रदान करने के लिए अधिकृत हैं तथा फर्जी संस्थानों से प्राप्त शैक्षणिक प्रमाणपत्र किसी भी प्रकार से मान्य नहीं होंगे।
निर्देशों के अनुसार विद्यार्थियों को प्रवेश लेने से पहले संबंधित संस्थान की मान्यता की जांच करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, साथ ही कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों को विशेष रूप से जागरूक किया जाएगा, जिससे वे उच्च शिक्षा में प्रवेश के समय किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बच सकें।
मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने इस जानकारी के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को दिए हैं, ताकि विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित रखा जा सके। यह पहल विद्यार्थियों की शिक्षा सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
मान्यता प्राप्त संस्थान ही डिग्री प्रदान कर सकते हैं
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की 18 मार्च की सार्वजनिक सूचना के अनुसार डिग्री केवल उन्हीं विश्वविद्यालयों या संस्थानों द्वारा प्रदान की जा सकती है, जो राज्य, केंद्र या प्रांतीय अधिनियम के अंतर्गत स्थापित हों अथवा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956 के अनुसार अधिकृत हों।
प्रवेश से पहले जांच अनिवार्य
किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की आधिकारिक सूची में अवश्य जांची जाए तथा केवल विज्ञापनों के आधार पर निर्णय न लिया जाए, साथ ही यदि कोई संस्थान नियमों के विपरीत शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित करता पाया जाए तो उसकी सूचना संबंधित प्राधिकरण को दी जाए।















