भोपाल, 23 मई ।
भोपाल शहर के प्रमुख चौराहों और रोड जंक्शनों पर लगे उच्च ध्वनि वाले सार्वजनिक संबोधन प्रणाली से उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने कड़ा रुख अपनाते हुए इनके संचालन पर रोक या प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए हैं।
पर्यावरण कार्यकर्ता राशिद नूर खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए सेंट्रल जोन बेंच ने स्पष्ट किया कि निर्धारित मानकों से अधिक ध्वनि उत्पन्न करने वाले सभी सार्वजनिक संबोधन सिस्टम को तत्काल प्रभाव से बंद, डिस्कनेक्ट अथवा प्रतिबंधित किया जाए।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से प्रस्तुत तर्कों में कहा गया कि स्मार्ट सिटी और ट्रैफिक पुलिस द्वारा लगाए गए लाउडस्पीकर दिनभर तेज आवाज में चलते रहते हैं, जिससे आवासीय क्षेत्र, अस्पताल, न्यायालय तथा शैक्षणिक संस्थानों जैसे शांत क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।
अधिकरण ने यह भी माना कि लगातार उच्च ध्वनि के कारण लोगों में तनाव, चिड़चिड़ापन तथा श्रवण क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं और यह स्थिति नागरिकों के शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।
सुनवाई में संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि प्रत्येक नागरिक को प्रदूषण रहित और शांत वातावरण में जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है।
मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए गए हैं कि वह शहर के प्रभावित क्षेत्रों में ध्वनि स्तर का विस्तृत अध्ययन करे तथा सार्वजनिक संबोधन प्रणाली के संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करे, जिसमें ध्वनि की अधिकतम सीमा और समय निर्धारण शामिल हो।
इसके साथ ही चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं और भोपाल कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को निर्धारित की गई है।












