कोलकाता, 19 मई।
दक्षिण 24 परगना के फलता विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उपचुनाव से ठीक दो दिन पहले तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनावी मैदान से पीछे हटने की घोषणा कर दी। मंगलवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अब इस उपचुनाव में भाग नहीं लेंगे। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा घोषित ‘स्पेशल पैकेज’ का स्वागत भी किया।
जहांगीर खान ने बताया कि उन्होंने यह फैसला फलता के विकास और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से लिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के विशेष पैकेज से क्षेत्र के विकास को बढ़ावा मिलेगा और वे चाहते हैं कि फलता तेजी से आगे बढ़े। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका चुनाव से हटना पार्टी नेतृत्व या अभिषेक बनर्जी के निर्देश पर हुआ है या व्यक्तिगत निर्णय था।
चुनाव से हटने के बावजूद क्योंकि नामांकन वापसी की समयसीमा समाप्त हो चुकी है, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में उनका नाम अभी भी रहेगा। वहीं, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भाजपा उम्मीदवार देवांशु पंडा के समर्थन में फलता में रोड शो कर रहे हैं। जहांगीर की घोषणा के बाद भाजपा समर्थकों में जोश देखा गया।
संवाददाता सम्मेलन में भावुक होते हुए जहांगीर खान ने कहा कि उनका सपना ‘सोनार फलता’ बनाने का था और क्षेत्र के लोगों के हित को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह कदम उठाया। उन्होंने चुनाव से हटने के पीछे किसी राजनीतिक दबाव या पार्टी के निर्देश की बात से बचते हुए कहा कि अब वे इस विषय पर और कुछ नहीं बोलना चाहते।
याद रहे कि 29 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव के दौरान फलता के कई बूथों में कथित अनियमितताओं और ईवीएम से छेड़छाड़ की शिकायतें आई थीं। इसके बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुनर्मतदान की मांग की थी, और निर्वाचन आयोग ने क्षेत्र में पुनर्निर्वाचन कराने का निर्णय लिया। इस दौरान राज्य में पहली बार भाजपा बहुमत के साथ सत्ता में आई।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान जहांगीर खान को पार्टी का अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। अंतिम चरण के मतदान से पहले अभिषेक बनर्जी उनके समर्थन में प्रचार करते दिखाई दिए, लेकिन उसके बाद तृणमूल का कोई बड़ा नेता उनके पक्ष में मैदान में नहीं उतरा।
सोमवार को जहांगीर खान ने गिरफ्तारी से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया। चुनावी अनियमितताओं के आरोपों पर उन्होंने कहा कि उन्होंने निर्वाचन आयोग के नियमों का पालन किया और किसी प्रकार की गड़बड़ी उनके निर्देश पर नहीं हुई।






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