धार, 19 मई।
मध्य प्रदेश के धार जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में मंगलवार को 'महासत्याग्रह' और 'महाविजय महोत्सव' का भव्य आयोजन किया गया। उच्च न्यायालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के ऐतिहासिक आदेशों के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु आतिशबाजी करते हुए मंदिर पहुंचे और महाआरती तथा हवन में भाग लिया।
मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर मान्यता दी, और एएसआई ने आदेश जारी कर हिंदू समाज को सालभर पूजन का अधिकार प्रदान किया। इसके बाद पूरे क्षेत्र में उत्साह की लहर दौड़ गई। श्रद्धालु सुबह से ही मंदिर परिसर में जुट गए और मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना के साथ अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित की।
भजन संध्या और हवन के दौरान श्रद्धालुओं ने आतिशबाजी कर विजय महोत्सव मनाया। परिसर में जयकारों और उत्सव के माहौल ने बसंत पंचमी और दीपावली का चित्र पेश किया। सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त रही, जिससे आयोजन में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आई।
भोज उत्सव समिति के गोपाल शर्मा ने बताया कि प्रत्येक मंगलवार भोजशाला में सत्याग्रह आयोजित होता है, लेकिन 365 दिन पूजन के आदेश के बाद यह पहला मंगलवार होने के कारण इसे 'महासत्याग्रह' का नाम दिया गया। सत्याग्रह के उपरांत श्रद्धालुओं ने पटाखों के साथ विजय महोत्सव मनाया।
श्रद्धालुओं की मांग है कि मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा लंदन से वापस लाई जाए, क्योंकि उनका मानना है कि मां की आत्मा अब मंदिर में विराजमान हो चुकी है और जल्द ही मूल स्वरूप स्थापित होना चाहिए।
पूर्व में रविवार को प्रतिकृति स्वरूप की स्थापना के बाद पूरे दिन मां का स्वरूप भोजशाला में विराजमान रहा और अखंड ज्योति लगातार प्रज्ज्वलित रही। अब हिंदू समाज द्वारा प्रतिदिन मंदिर में मां का पूजन किया जाएगा।






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