रोम, 21 मई।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति सामान्यतः शक्ति संतुलन, रणनीतिक हितों और आर्थिक समझौतों के आधार पर आगे बढ़ती है, लेकिन कई बार छोटे प्रतीकात्मक संकेत भी वैश्विक राजनीति में बड़ा संदेश दे जाते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को ‘मेलोडी’ नामक चॉकलेट भेंट किया जाना ऐसा ही एक प्रतीकात्मक क्षण माना जा रहा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर सौहार्द और आत्मीयता की नई चर्चा को जन्म दिया है।
यह केवल एक उपहार नहीं बल्कि “मोदी” और “मेलोनी” नामों के मेल से सोशल मीडिया पर बने “मेलोडी” शब्द को एक सांस्कृतिक और कूटनीतिक संदेश में बदलने का प्रतीकात्मक प्रयास माना जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान केवल आर्थिक या सामरिक शक्ति तक सीमित नहीं रखी है, बल्कि सांस्कृतिक आत्मविश्वास और परंपरागत मूल्यों को भी कूटनीति का हिस्सा बनाया है।
योग, आयुर्वेद, भारतीय भोजन, मोटे अनाज और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रतीकों के बाद अब “मीठी कूटनीति” का यह उदाहरण उसी दिशा में एक नया कदम माना जा रहा है।
इस भेंट के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि भारत की विदेश नीति केवल औपचारिक वार्ताओं और दस्तावेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानवीय रिश्तों की भावनात्मक गर्माहट भी शामिल है।
वर्ष 2024 के जी-7 सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी द्वारा साझा किया गया “मेलोडी” वीडियो सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुआ था, जिसने दोनों नेताओं के बीच सहज संबंधों को चर्चा में ला दिया था।
अब उसी डिजिटल अभिव्यक्ति को प्रतीकात्मक उपहार के माध्यम से एक कूटनीतिक संदेश में बदल दिया गया है, जिससे यह मामला अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी चर्चा का विषय बन गया है।
भारत और इटली के संबंध पिछले वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं, जिसमें व्यापार, रक्षा, हरित ऊर्जा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक सहयोग जैसे क्षेत्र प्रमुख रहे हैं।
यूरोप में इटली भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभरा है, जबकि भारत भी इटली के लिए एशियाई क्षेत्र में एक भरोसेमंद सहयोगी के रूप में देखा जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर युद्ध, आर्थिक अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव के बीच नेताओं के बीच व्यक्तिगत विश्वास और सहज संबंध भी कूटनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
हालांकि कुछ वर्गों ने इसे प्रतीकात्मक राजनीति बताया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सांस्कृतिक प्रतीकों और भावनात्मक संकेतों की अपनी अलग अहमियत होती है।
कई देश लंबे समय से सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से अपनी वैश्विक पहचान मजबूत करते रहे हैं, और भारत भी इसी दिशा में अपनी भूमिका विस्तार कर रहा है।
कूटनीति केवल नीतिगत दस्तावेजों और समझौतों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह भावनाओं और विश्वास की भी भाषा होती है, और इसी दृष्टि से यह छोटा-सा उपहार बड़ा संदेश देता है।
रोम से उठी यह प्रतीकात्मक मिठास अब भारत की उस नई कूटनीतिक शैली की ओर संकेत कर रही है, जिसमें सांस्कृतिक जुड़ाव और मानवीय संबंधों को वैश्विक राजनीति का हिस्सा बनाया जा रहा है।





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