संपादकीय
21 May, 2026

आसमान से बरसती आग, जमीन पर पिघलता जनजीवन

मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में भीषण गर्मी और लू के चलते तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से जनजीवन प्रभावित हो गया है, जिससे कई जिलों में रेड अलर्ट और गंभीर हालात बने हुए हैं।

भोपाल, 21 मई।

प्रदेश समेत देश के कई हिस्से इस समय भीषण गर्मी और तेज लू की चपेट में आकर झुलस रहे हैं, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं।

छतरपुर जिले के नौगांव में तापमान 47 डिग्री तक पहुंच गया है, जिसने पिछले लगभग नौ वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, वहीं राजधानी भोपाल में पारा 44.2 से 46 डिग्री के बीच लगातार उतार-चढ़ाव कर रहा है।

इंदौर, ग्वालियर, रतलाम, खंडवा, बैतूल, जबलपुर, सागर, खजुराहो, भिंड, रीवा और दमोह सहित तीन दर्जन से अधिक जिलों में गर्मी की स्थिति अत्यंत भयावह बनी हुई है।

मौसम केंद्र के अनुसार प्रदेश के सभी जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया है, जबकि 24 जिलों में यह 43 डिग्री से अधिक और 22 जिलों में 44 डिग्री के आसपास पहुंच चुका है।

11 जिलों में भीषण लू की स्थिति दर्ज की गई है, जहां तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण खजुराहो में 46.4, दतिया में 45.8, दमोह में 45.5 और टीकमगढ़ में 45.2 डिग्री तक तापमान पहुंच गया है।

रतलाम, भिंड, निवाड़ी, सतना, सीधी और सिंगरौली जैसे जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है, जहां मौसम की स्थिति को अत्यंत खतरनाक श्रेणी में रखा गया है।

भीषण गर्मी का असर अब केवल तापमान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर दैनिक जीवन पर भी दिखाई देने लगा है, जहां जनजीवन की रफ्तार थम सी गई है।

दमोह-जबलपुर-रीवा मार्ग पर डामर के पिघलने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे सड़क पर वाहन फिसलने जैसी स्थिति बन रही है और यातायात प्रभावित हो रहा है।

मजदूर, किसान और छोटे व्यवसाय से जुड़े लोग दोपहर के समय काम बंद करने को मजबूर हो गए हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है।

लू लगने से प्रदेश में दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिससे गर्मी की भयावहता और अधिक गंभीर रूप ले चुकी है।

जंगलों में पानी के स्रोत सूखने के कारण वन्य जीव जैसे हिरण, नीलगाय और तेंदुए भोजन और पानी की तलाश में गांवों की ओर रुख कर रहे हैं।

सरकारी स्तर पर हीट स्ट्रोक वार्ड बनाए जाने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है और स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, पेड़ों की कमी और भूजल स्तर में गिरावट इस भीषण गर्मी के प्रमुख कारण हैं, जिससे यह संकट और गहरा हो रहा है।

यह स्थिति अब केवल मौसमी बदलाव नहीं रह गई है, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर आपातकाल का रूप ले चुकी है, जिससे आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद कम दिखाई दे रही है। 

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