संपादकीय
21 May, 2026

लाल बत्ती पर जल रहा देश का ईंधन: ट्रैफिक सिग्नल पर 90 से 120 सेकंड का इंतजार, रोज बर्बाद हो रहे करोड़ों के पेट्रोल-डीजल

ट्रैफिक सिग्नलों पर लंबे इंतजार के दौरान पेट्रोल-डीजल की भारी बर्बादी और बढ़ते प्रदूषण ने शहरों की ट्रैफिक व्यवस्था और स्मार्ट सिग्नल प्रणाली की जरूरत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भोपाल, 21 मई।

शहरों के ट्रैफिक सिग्नलों पर रोजाना लगने वाले लंबे इंतजार के दौरान देशभर में भारी मात्रा में पेट्रोल और डीजल की बर्बादी का मामला सामने आया है, जहां 60 से 120 सेकंड तक लाल बत्ती पर रुके रहने से करोड़ों रुपये का ईंधन रोजाना अनावश्यक रूप से जल रहा है और यह स्थिति अब आर्थिक नुकसान के साथ-साथ पर्यावरणीय संकट का कारण बनती जा रही है।

रोजमर्रा की आवाजाही में जब लोग दफ्तर, स्कूल या बाजार जाते हैं तो चौराहों पर बार-बार रुकना पड़ता है, जहां इंजन चालू रहने के कारण ईंधन लगातार खर्च होता रहता है और विशेषज्ञों के अनुसार केवल एक मिनट में ही दोपहिया और चारपहिया वाहन पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल जला देते हैं, जिससे बड़े शहरों में कुल मिलाकर भारी आर्थिक क्षति हो रही है।

बड़े महानगरों में वाहनों की संख्या लाखों में होने के कारण लाल बत्ती पर रुकने का यह सिलसिला प्रतिदिन हजारों लीटर ईंधन की बर्बादी में बदल जाता है, जहां इंजन बंद न करने की मजबूरी और लंबे सिग्नल टाइमिंग के कारण लोगों को न सिर्फ आर्थिक नुकसान होता है बल्कि समय की भी भारी हानि झेलनी पड़ती है।

कई चौराहों पर स्थिति और अधिक जटिल हो जाती है, जहां एक बार ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद भी जाम की वजह से वाहन आगे नहीं बढ़ पाते और अगले चक्र में फिर लाल बत्ती का सामना करना पड़ता है, जिससे वाहन चालकों को लंबे समय तक चौराहों पर फंसे रहना पड़ता है और प्रदूषण भी लगातार बढ़ता जाता है।

शहरों में अधिकतर ट्रैफिक सिग्नल समय आधारित प्रणाली पर चलते हैं, जबकि ट्रैफिक की वास्तविक स्थिति को ध्यान में नहीं रखा जाता, जिसके कारण खाली सड़क होने पर भी सिग्नल निर्धारित समय तक लाल रहता है और कई जगहों पर सिग्नल के बीच समन्वय की कमी से वाहन बार-बार रुकने को मजबूर होते हैं।

वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण से देखा जाए तो कई देशों में ट्रैफिक आधारित सिग्नल और समन्वित ग्रीन कॉरिडोर जैसी व्यवस्था लागू की गई है, जिससे वाहनों की रफ्तार स्थिर रहती है और रुकने की आवश्यकता कम होती है, लेकिन अधिकांश भारतीय शहरों में ऐसी आधुनिक व्यवस्था अभी तक विकसित नहीं हो सकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सेंसर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सिग्नल प्रणाली अपनाकर ट्रैफिक के अनुसार समय को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे भीड़ कम होने पर सिग्नल जल्दी खुल जाए और प्रमुख मार्गों पर लगातार यातायात बना रहे, जिससे ईंधन की बचत संभव है।

इसके साथ ही सुझाव दिया जा रहा है कि लंबे इंतजार के दौरान इंजन बंद करने की आदत को बढ़ावा दिया जाए और फ्लाईओवर, अंडरपास तथा राउंडअबाउट जैसी संरचनाओं को बढ़ाकर सिग्नल पर निर्भरता कम की जाए, ताकि यातायात अधिक सुचारु और निरंतर बना रहे।

लाल बत्ती पर अनुशासन, इंजन बंद करने की आदत और ट्रैफिक नियमों के पालन से न केवल ईंधन की भारी बचत संभव है, बल्कि वायु प्रदूषण में भी कमी लाई जा सकती है, जिससे शहरों में समय, पैसा और पर्यावरण तीनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकती है।

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