भोपाल, 21 मई ।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए कि सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए तथा गुरु सांदीपनि के जीवन पर आधारित एक रोचक पुस्तक तैयार की जाए। साथ ही कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए कृत्रिम बुद्धिमता के कौशल को जोड़ने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।
उन्होंने निजी विद्यालयों की स्थापना के लिए सामाजिक संस्थाओं और संगठनों को प्रोत्साहित करने के भी निर्देश दिए। अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया एक जुलाई से पहले पूर्ण करने तथा सत्र प्रारंभ होने से पूर्व सभी स्कूलों की आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा गया। इसके साथ ही जीर्ण-शीर्ण स्कूलों की तत्काल मरम्मत और सभी विद्यालयों में बाउंड्री वॉल बनाने के निर्देश भी दिए गए।
मुख्यमंत्री ने एक जुलाई से गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) तक “शिक्षक वंदना कार्यक्रम” अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालयों की अवधारणा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए और शिक्षा की गुणवत्ता के लिए समय पर संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
उन्होंने कहा कि जिन शालाओं में शत-प्रतिशत परिणाम आया है, उन शिक्षकों का सम्मान किया जाए। साथ ही 90 से 95 प्रतिशत से अधिक परिणाम देने वाले विद्यालयों को भी प्रोत्साहित किया जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश की 26 शालाओं में शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा है।
मुख्यमंत्री ने जिलों को दो श्रेणियों में विभाजित कर व्यवस्थाओं की समीक्षा करने, भौतिक व मानव संसाधन की कमी वाले जिलों पर विशेष ध्यान देने और स्थानीय विधायकों के साथ मिलकर स्कूल सुधार कार्यों को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी लंबित घोषणाओं को शीघ्र पूरा किया जाए और एक वर्ष से पुरानी कोई घोषणा लंबित न रहे।
उन्होंने कहा कि स्कूलों में व्यावसायिक प्रशिक्षण के तहत कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रम शामिल किए जाएं तथा स्व-सहायता समूहों से विद्यार्थियों को जोड़ा जाए। एनसीसी, एनएसएस, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, ड्राइविंग लाइसेंस कैंप और कोचिंग सुविधाओं को भी बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। साथ ही विद्यार्थियों के आगे के करियर की ट्रैकिंग कर डेटाबेस तैयार करने पर जोर दिया गया।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025-26 में कक्षा-1 में नामांकन में 32.4 प्रतिशत और कक्षा 9 से 12 में 4.25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रवेशोत्सव के तहत 92 प्रतिशत से अधिक प्रवेश भी पूर्ण हो चुके हैं। इसके साथ ही दो स्थानों पर सांस्कृतिक विद्यालय शुरू किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने “शिक्षा घर योजना” को भी मंजूरी प्रदान की, जिसके तहत पढ़ाई बीच में छोड़ चुके विद्यार्थियों को पुनः परीक्षा उत्तीर्ण करने का अवसर मिलेगा। इस योजना का संचालन राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे बच्चों की शिक्षा के लिए प्रारंभ से ही बेहतर माहौल बनाया जाए तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ मिलकर शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों विभाग पहली बार संयुक्त रूप से कार्य करेंगे।




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