नई दिल्ली, 21 मई ।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा पूरी करने के बाद स्वदेश वापसी की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शीर्ष नेताओं को भारत की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक शिल्प और समृद्ध विरासत को दर्शाने वाले विशेष उपहार भेंट किए।
इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मैटरेला को आगरा के कारीगरों द्वारा निर्मित संगमरमर जड़ाई वाला बक्सा भेंट किया गया, जिसमें भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी और एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी की सीडी शामिल थी। वहीं इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को असम का मूगा रेशमी शॉल और मणिपुर की शिरुई लिली से प्रेरित सिल्क स्टोल दिया गया।
नीदरलैंड के राजा विलेम अलेक्जेंडर को जयपुर की ब्लू पॉटरी कलाकृतियां भेंट की गईं, जबकि रानी मैक्सिमा को मीनाकारी और कुंदन से बनी बालियां दी गईं। प्रधानमंत्री रोब जेटेन को मधुबनी पेंटिंग भेंट की गई, जिसमें पारंपरिक मछली रूपांकन शामिल था।
नॉर्वे की रानी को ओडिशा की ताड़-पत्र पट्टाचित्र कला, युवराज को सूर्य-चंद्रमा आधारित कलमकारी पेंटिंग और प्रधानमंत्री को सिक्किम के ऑर्किड से बनी कलाकृति तथा चांदी का नौका मॉडल भेंट किया गया। नॉर्वे के राजा को कटक की तारकासी कला का चांदी मॉडल दिया गया।
स्वीडन के प्रधानमंत्री को शांतिनिकेतन मैसेंजर बैग, लद्दाख का पश्मीना शॉल, लोकतक चाय और रवींद्रनाथ टैगोर की कृतियों का संग्रह भेंट किया गया। वहीं क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया को गोंड चित्रकला और प्रधानमंत्री द्वारा लिखित पुस्तक दी गई।
संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति को कच्छ की रोगन पेंटिंग और कृषि उत्पाद के रूप में केसर आम एवं मेघालय का अनानास भेंट किया गया। यूएई की राजमाता को करीमनगर फिलिग्री बॉक्स, माहेश्वरी रेशमी कपड़ा और चक हाओ चावल दिए गए, जबकि युवराज को कोफ्तगारी डैगर और मिथिला मखाना भेंट किया गया।
डेनमार्क के प्रधानमंत्री को बिदरी चांदी का गुलदस्ता, आइसलैंड के प्रधानमंत्री को तेनजिंग नोर्गे की बर्फ कुल्हाड़ी की प्रतिकृति और फिनलैंड के प्रधानमंत्री को कमल तलाई पिछवाई पेंटिंग भेंट की गई। खाद्य एवं कृषि संगठन के महानिदेशक को बाजरे की पौष्टिक बार और विभिन्न पारंपरिक अनाजों का संग्रह दिया गया।
ये सभी उपहार भारत की कला, शिल्प, कृषि परंपरा और जीआई उत्पादों को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के साथ-साथ ‘लोकल टू ग्लोबल’ और सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूती प्रदान करते हैं।












