नई दिल्ली, 21 मई ।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेन्द्र भूषण ने कहा कि देश के अधिकांश राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में रिकॉर्ड्स ऑफ राइट्स के डिजिटलीकरण का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रभावी भूमि प्रशासन और भूमि संसाधनों का बेहतर उपयोग आर्थिक विकास को गति देने के साथ समावेशी विकास सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाता है।
एशियाई विकास बैंक के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में सचिव ने बताया कि विभिन्न राज्यों में लिखित भूमि अभिलेखों को जमाबंदी नक्शों से जोड़ने की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। विभाग अब डीआईएलआरएमपी 3.0 के अगले चरण को लागू करने की तैयारी कर रहा है, जिसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से भूमि शासन प्रणाली को और मजबूत करना है।
उन्होंने जानकारी दी कि देशभर में भूमि पार्सलों को विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या देने की प्रक्रिया भी तेज़ी से आगे बढ़ रही है और अब तक लगभग 66 प्रतिशत कृषि भूमि पार्सलों को यूएलपीआईएन जारी किए जा चुके हैं।
सचिव ने बताया कि विभाग डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के अगले चरण के रूप में एक व्यापक “लैंड स्टैक” विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके तहत भूमि अभिलेख, पंजीकरण, म्यूटेशन, भूमि उपयोग और अन्य सेवाओं को एकीकृत डिजिटल प्रणाली से जोड़ा जाएगा, जिससे शासन और सेवा वितरण अधिक प्रभावी हो सकेगा।
जलसंभर विकास पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए जलवायु-अनुकूल भूमि एवं जल प्रबंधन पद्धतियां आवश्यक हैं। इसके लिए नई वित्तीय व्यवस्था, तकनीकी समाधान और समन्वित प्रयासों पर बल दिया गया।
एशियाई विकास बैंक की कंट्री डायरेक्टर ने भारत में विभिन्न परियोजनाओं और राज्य सरकारों के साथ चल रहे सहयोग की जानकारी साझा की। उन्होंने डिजिटल कृषि, जलवायु अनुकूलन, जलसंभर प्रबंधन और संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई।
बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे और भूमि प्रशासन तथा विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।












