क्वेटा, 22 मई।
बलूचिस्तान के अवारान जिले में सेना द्वारा आम नागरिकों के मकान ढहाने की खबरों ने मानवाधिकारों के मुद्दे पर नया बवाल खड़ा कर दिया है। एक स्थानीय मानवाधिकार संस्था ने इसे वहां के निवासियों को निशाना बनाने की सुनियोजित प्रक्रिया करार देते हुए तीखी आलोचना की है।
संगठन के अनुसार, 13 मई को अवारान के पीर मशकई और कल्लार इलाकों में सैन्य अभियान के नाम पर दो परिवारों के आशियाने बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिए गए। संस्था का कहना है कि सुरक्षा के बहाने स्थानीय लोगों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना और परिवारों पर दबाव बनाना वहां की एक दुखद सच्चाई बन चुका है। यद्यपि इन दावों की किसी निष्पक्ष संस्था से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पाकिस्तानी प्रशासन ने भी अभी तक इन गंभीर आरोपों पर चुप्पी साध रखी है।
इलाके में तनाव का आलम यह है कि हालिया घटनाओं में दो लोगों के लापता होने की खबरों ने भी आग में घी डालने का काम किया है। इनमें से एक छात्र और एक प्रवासी वाहन चालक बताया जा रहा है। मानवाधिकार पैरोकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में कानून का पालन होना चाहिए ताकि प्रभावित परिवारों को न्याय और सही जानकारी मिल सके।
इसी बीच केच जिले में सुरक्षा बलों के अभियान के दौरान एक बुजुर्ग की मौत का मामला भी सामने आया है, जिसे लेकर वहां के लोगों में भारी आक्रोश है। हालातों को देखते हुए विभिन्न मानवाधिकार समूहों ने अब संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक संस्थाओं से इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और पारदर्शी जांच की मांग की है।






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