भोपाल, 22 मई।
मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मृत्यु प्रकरण में गुरुवार को प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई की गई, जिसके तहत गिरीबाला सिंह को जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने के आदेश जारी किए गए। साथ ही संबंधित विभाग ने उनकी नियुक्ति की जांच कराने की बात भी कही है।
खाद्य मंत्री गोविंद राजपूत ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए उनकी नियुक्ति की विस्तृत जांच कराए जाने की बात कही है।
विभाग द्वारा जारी जानकारी में बताया गया है कि मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग से प्राप्त सूचना के अनुसार गिरीबाला सिंह के विरुद्ध थाना कटारा हिल्स में पुलिस आयुक्त कार्यालय के माध्यम से बीएनएस और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
वर्तमान में गिरीबाला सिंह जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग क्रमांक-दो में अध्यक्ष पद पर कार्यरत थीं, जहां राज्य आयोग के अध्यक्ष उनके प्रशासकीय नियंत्रणकर्ता हैं। इसी आधार पर विभाग ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए राज्य आयोग के रजिस्ट्रार को पत्र भेजा है।
गौरतलब है कि ट्विशा शर्मा की 12 मई की रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। वह गर्भवती थीं और ससुराल पक्ष ने इसे फांसी लगाकर आत्महत्या बताया, जबकि मायके पक्ष ने पति समर्थ सिंह और अन्य ससुरालियों पर हत्या के आरोप लगाए हैं। पति फिलहाल फरार है।
मामले की जांच में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं, जिसके चलते आरोपी समर्थ सिंह की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए छह पुलिस टीमें गठित की गई हैं, साथ ही एसआईटी का गठन कर लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है।
पुलिस कमिश्नर द्वारा आरोपी पर घोषित इनाम राशि को बढ़ाकर तीस हजार रुपये कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार भोपाल एम्स की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों के निशान पाए गए थे, जो घटना के 24 घंटे के भीतर पुलिस को मिल गई थी, लेकिन इसके बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हो सकी।
इधर परिजन लगातार इसे संदिग्ध मौत बताते हुए कार्रवाई में लापरवाही के आरोप लगा रहे हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर ट्विशा का एक पुराना वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह धार्मिक गीत पर पालतू कुत्ते के साथ नृत्य करती नजर आ रही हैं।
इस मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह ने उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है, जिसकी सुनवाई आगामी दिनों में होने की संभावना है। उनके वकील का कहना है कि आरोप बेबुनियाद हैं और कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच राज्य के बाहर कराए जाने की मांग भी उठाई जा रही है।
इससे पहले जिला अदालत में उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है, जबकि उनकी मां गिरीबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिल चुकी है।
परिवार पक्ष के वकील ने आरोप लगाया है कि जमानत देने में कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी।
इधर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इस मामले को लेकर प्रतिक्रिया तेज हो गई है तथा कई नेताओं और फिल्मी हस्तियों ने ‘जस्टिस फॉर ट्विशा’ की मांग उठाई है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने सोशल मीडिया पर मामले की गंभीर जांच और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है। वहीं एक फिल्मी अभिनेत्री और सांसद ने भी शादीशुदा महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं।
मिसेज यूनिवर्स इंडिया रही एक मॉडल ने इस मामले में आत्महत्या के पहलू पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में वैकल्पिक रास्तों की संभावना भी रहती है, जबकि एक अन्य अभिनेत्री ने शादी के कुछ महीनों बाद हुई इस घटना पर गहरा दुख जताया है।
पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी ने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस को वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम जैसे ठोस आधारों पर निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
इसी बीच एक अन्य अभिनेत्री ने दहेज प्रथा और समाज में महिलाओं की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए सामाजिक सोच पर भी टिप्पणी की है।






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