नई दिल्ली, 22 मई।
विदेश दौरों से लौटने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सक्रियता दिखाते हुए मंत्रिपरिषद की एक अहम बैठक बुलाई। गुरुवार को सेवा तीर्थ में आयोजित इस उच्चस्तरीय मैराथन मंथन में सरकार के भावी एजेंडे और प्रशासन को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने पर गहन विचार-विमर्श किया गया। करीब साढ़े चार घंटे तक चली इस बैठक का मुख्य केंद्र 'विकसित भारत 2047' का विजन और प्रशासनिक सुधार रहा।
बैठक में नौ प्रमुख मंत्रालयों के कामकाज का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया, जिसके माध्यम से पिछले दो वर्षों की कार्यप्रणाली का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया गया। इस दौरान सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही, पश्चिम एशिया के वर्तमान हालातों के मद्देनजर देश की आर्थिक नीतियों और विकास की आगामी रूपरेखा पर भी चर्चा हुई।
विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री के हालिया पांच देशों के दौरे से निकले सकारात्मक परिणामों की जानकारी अन्य साथियों के साथ साझा की। सुरक्षा कारणों और पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं के चलते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा इस बैठक में शामिल नहीं हो सके, जबकि शेष केंद्रीय और राज्य मंत्री इसमें उपस्थित रहे।
यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि करीब एक वर्ष के अंतराल पर इसका आयोजन हुआ है। अब इस बड़ी बैठक के बाद सियासी गलियारों में मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव की चर्चाएं जोर पकड़ने लगी हैं, और कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले महीने बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।






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