नई दिल्ली, 22 मई।
नसों के दर्द, मिर्गी और एंग्जायटी जैसी गंभीर समस्याओं के उपचार में काम आने वाली दवा 'प्रेगबलिन' की बिक्री अब सख्त नियमों के दायरे में आ गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस दवा को 'शेड्यूल एच 1' की श्रेणी में शामिल करने का आधिकारिक निर्णय लिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य दवा के बढ़ते दुरुपयोग और बिना किसी चिकित्सीय परामर्श के इसकी आसानी से होने वाली खरीद-फरोख्त पर अंकुश लगाना है।
मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब मेडिकल स्टोर्स पर इस दवा की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। जो भी केमिस्ट या रिटेलर इन नियमों का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पिछले कुछ समय से प्रेगबलिन के गलत इस्तेमाल और नशे के रूप में इसके उपयोग की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, जिसके बाद सरकार ने मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह कड़ा निर्णय लिया है।
नए आदेशों के बाद, प्रेगबलिन केवल किसी रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर द्वारा जारी वैध पर्चे पर ही मिल सकेगी। विक्रेताओं को अब डॉक्टर और मरीज का पूरा विवरण, जैसे नाम, पता और दवा की मात्रा एक विशेष रजिस्टर में दर्ज करना होगा। इसके अतिरिक्त, इस दवा की हर पैकेजिंग पर लाल रंग से “चेतावनी” अंकित करना भी अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि निगरानी को और अधिक पारदर्शी बनाया जा सके।






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