जबलपुर, 22 मई।
मध्य प्रदेश के जबलपुर में अत्यधिक गर्मी के बीच एनसीसी प्रशिक्षण शिविर के दौरान लगभग दो दर्जन कैडेट्स की तबीयत अचानक बिगड़ गई। खुले मैदान में तेज धूप और लू के बीच चल रही ट्रेनिंग के कारण कई कैडेट्स डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक से प्रभावित हो गए। गंभीर स्थिति वाले कैडेट्स को देर रात जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
यह घटना डुमना रोड स्थित ट्रिपल आईटीडीएम परिसर में चल रहे 10 दिवसीय संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर (CATC-98) के दौरान हुई। इस शिविर में कटनी, तेंदूखेड़ा, कटंगी और नुनसर सहित विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 450 कैडेट्स भाग ले रहे हैं।
गुरुवार को जबलपुर में तापमान लगभग 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, इसके बावजूद कैडेट्स को खुले मैदान में लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा था। तीव्र गर्मी और लू के प्रभाव से कई कैडेट्स को चक्कर, उल्टी, दस्त और कमजोरी जैसी समस्याएं होने लगीं।
स्थिति उस समय गंभीर हो गई जब कुछ छात्राएं मैदान में ही बेहोश होकर गिर पड़ीं। इसके बाद प्रशासन ने प्रभावित कैडेट्स को एम्बुलेंस के माध्यम से रात करीब 8:30 बजे जिला अस्पताल पहुंचाया।
एक साथ बड़ी संख्या में कैडेट्स के पहुंचने से अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में अव्यवस्था की स्थिति बन गई। अतिरिक्त डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की तैनाती करनी पड़ी, साथ ही बेड, ड्रिप और आवश्यक दवाओं की व्यवस्था भी बढ़ाई गई।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी ने शुक्रवार सुबह जानकारी दी कि सभी प्रभावित कैडेट्स की स्थिति फिलहाल स्थिर है। कुछ छात्राओं को निगरानी में भर्ती रखा गया है।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर फूड प्वाइजनिंग की चर्चाएं सामने आईं, हालांकि अस्पताल प्रशासन और एनसीसी अधिकारियों ने इसे खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सभी कैडेट्स हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन से प्रभावित हुए हैं।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि बीमार हुए छात्र एनसीसी कैडेट्स हैं और उनका ट्रिपल आईटीडीएम संस्थान के नियमित विद्यार्थियों से कोई संबंध नहीं है।
घटना के बाद शिविर की व्यवस्थाओं और भीषण गर्मी में खुले मैदान में लगातार प्रशिक्षण कराने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कुछ कैडेट्स ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि अत्यधिक तापमान के बावजूद कठिन प्रशिक्षण जारी रहा।
स्थानीय स्तर पर मामले की जांच की मांग तेज हो गई है। यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि जब तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका था, तब खुले मैदान में लंबे समय तक प्रशिक्षण क्यों जारी रखा गया।






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