कोरबा, 22 मई।
भीषण गर्मी के इस दौर में कोरबा की बिजली व्यवस्था पूरी तरह से हांफ गई है। शहर के रिहायशी इलाकों से लेकर दूरदराज के ग्रामीण अंचलों तक, लोग अघोषित बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और ओवरलोडिंग के संकट से जूझ रहे हैं। दर्री जोन स्थित सर्वमंगला नगर के वार्ड 61-62 और तुमान फीडर से जुड़े गांवों में तो स्थिति और भी भयावह हो गई है, जहाँ बिजली की आंख-मिचौनी ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
सर्वमंगला नगर के रहवासियों का कहना है कि बिजली की कटौती अब एक रूटीन बन गई है। रात भर बिजली गायब रहने के कारण बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों का बुरा हाल है। इन्वर्टर जवाब दे चुके हैं और पानी की मोटरें न चलने से पेयजल का संकट भी गहरा गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग के अधिकारी फोन तक नहीं उठाते और महज 'फॉल्ट सुधारने' का बहाना बनाकर उन्हें टाल देते हैं। उपभोक्ताओं में इस बात का जबरदस्त आक्रोश है कि समय पर बिल न भरने पर विभाग तुरंत कार्रवाई करता है, लेकिन बिजली न मिलने पर किसी अधिकारी की जवाबदेही तय नहीं होती।
ग्रामीण क्षेत्रों में तुमान फीडर पर बढ़े ओवरलोड का असर शुक्रवार सुबह से ही दिखने लगा। सुबह करीब साढ़े सात बजे गुल हुई बिजली चार घंटे की मशक्कत के बाद जैसे-तैसे बहाल हुई, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद फिर गुल हो गई। सलिहाभांठा, पकरिया, बंधवाभांठा, डोंगरीभांठा, सराईडीह, बरपाली और निचली बस्ती समेत कई गांवों में बिजली न रहने से फ्रिज, कूलर और पंखे बंद पड़ गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मेंटेनेंस के नाम पर विभाग हर साल केवल खानापूर्ति करता है।
हालात यह हैं कि एई और जेई के दावे के बावजूद व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट सकी है। बढ़ते आक्रोश के बीच नागरिकों और ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि बिजली आपूर्ति का स्थायी समाधान जल्द नहीं निकाला गया, तो वे विभागीय कार्यालय का घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेंगे और उच्च अधिकारियों तक अपनी शिकायत पहुंचाएंगे।





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