नई दिल्ली, 22 मई ।
भारत और साइप्रस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का नया स्वरूप देते हुए कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय वार्ता में दोनों देशों के नेताओं ने रक्षा, सुरक्षा, शिक्षा, संस्कृति, व्यापार और समुद्री सहयोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच कुल छह महत्वपूर्ण समझौतों और सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें आतंकवाद-रोधी सहयोग के लिए संयुक्त कार्य समूह के गठन का समझौता शामिल है, जिससे सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा राजनयिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत के सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान और साइप्रस की डिप्लोमैटिक अकादमी के बीच भी सहमति बनी।
नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिसके तहत साइप्रस के शोध एवं डिजिटल नीति विभाग और भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच समझौता किया गया। इसी तरह खोज एवं बचाव अभियानों में सहयोग के लिए एक तकनीकी व्यवस्था को भी अंतिम रूप दिया गया है।
उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए अलग समझौता हुआ है, जबकि सांस्कृतिक सहयोग को वर्ष 2026 से 2030 तक और मजबूत करने पर भी सहमति बनी।
दोनों देशों ने कई नई पहल की भी घोषणा की है, जिनमें 2026 से 2031 तक रक्षा सहयोग का रोडमैप तैयार करना और साइबर सुरक्षा तथा कांसुलर संवाद की अलग व्यवस्था स्थापित करना शामिल है। साइप्रस ने भारत की इंडो-पैसिफिक महासागरीय पहल के व्यापार, संपर्क और समुद्री परिवहन वाले स्तंभ में शामिल होने का निर्णय भी लिया है।
आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के तहत साइप्रस मुंबई में एक व्यापार केंद्र स्थापित करने की योजना बना रहा है, जिससे निवेश और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। वहीं भारत की ओर से साइप्रस को स्वास्थ्य और सहयोग से जुड़ी एक विशेष पहल उपहार स्वरूप प्रदान की जाएगी तथा 18 मई 2026 को पहला भारत–साइप्रस अंतरिक्ष दिवस मनाने की घोषणा भी की गई है।












