काठमांडू, 23 मई ।
नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी) यानी नेकपा-एमाले में पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के नेतृत्व को लेकर अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है और पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों ने अब नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज कर दी है।
शनिवार को आयोजित संगठनात्मक बैठक के दौरान कई वरिष्ठ नेताओं ने अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमंत्री ओली से पद छोड़ने की बात कही। बैठक में मौजूद चार प्रमुख पदाधिकारियों ने स्पष्ट रूप से ओली के सामने नेतृत्व बदलाव का सुझाव रखा।
यह पहला अवसर माना जा रहा है जब पार्टी के भीतर से, खासकर लंबे समय तक उनके सहयोगी रहे वरिष्ठ नेताओं द्वारा, उनके नेतृत्व पर सीधी चुनौती दी गई है। जेन जी आंदोलन और हालिया चुनाव परिणामों के बाद से समय-समय पर उनके इस्तीफे की मांग उठती रही है।
सूत्रों के अनुसार, 5 मार्च के चुनाव के बाद ओली के निवास पर शुरू हुई बैठक के दूसरे दिन उपाध्यक्ष राम बहादुर थापा, विष्णु पौडेल, महासचिव शंकर पोखरेल और पृथ्वी सुब्बा गुरूंग ने नेतृत्व परिवर्तन की आवश्यकता जताते हुए इस्तीफे की मांग की। ये वही नेता हैं जिन्होंने 11वें महाधिवेशन में ओली का समर्थन किया था, लेकिन अब उन्होंने नई नेतृत्व दिशा की जरूरत बताई है।
बैठक में विष्णु पौडेल ने पार्टी के भीतर आयु सीमा और कार्यकाल संबंधी नियमों में बदलाव पर भी असंतोष जताया और कहा कि वर्तमान नेतृत्व शैली के साथ संगठन आगे नहीं बढ़ सकता।
उन्होंने कहा कि पार्टी को इस तरह चलाना संभव नहीं है और सभी को आत्मसमीक्षा करनी होगी, अन्यथा संगठन कमजोर हो जाएगा। साथ ही उन्होंने हालिया चुनाव और पिछले वर्ष हुए प्रदर्शनों के बाद बदलते राजनीतिक हालात का हवाला देते हुए कहा कि पुरानी कार्यशैली अब उपयुक्त नहीं है।
इसी बीच पृथ्वी सुब्बा गुरूंग ने कहा कि पार्टी किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है और ओली को अनिश्चितकाल तक अध्यक्ष बने रहने का अधिकार नहीं है। उनकी इस टिप्पणी पर ओली नाराज हो गए और बैठक में तीखी बहस की स्थिति बन गई।
पार्टी सचिव महेश बस्नेत ने बताया कि जो नेता लंबे समय तक ओली के साथ खड़े रहे, उन्हीं की ओर से अब दूरी बनाना उनके लिए निराशाजनक स्थिति है और इसी कारण बैठक में तनाव बढ़ गया।
सूत्रों के मुताबिक, ओली ने चेतावनी भी दी कि कठिन समय में साथ न देने वाले नेताओं को भविष्य में जिम्मेदारियों के वितरण के दौरान इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
पार्टी सचिवालय में मौजूद अधिकांश नेताओं का कहना है कि जिन वरिष्ठ नेताओं को 11वें महाधिवेशन में शीर्ष पदों तक पहुंचाने में ओली की अहम भूमिका रही, अब उन्हीं की आलोचना से वह असंतुष्ट और आहत नजर आ रहे हैं।






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