संपादकीय
23 May, 2026

60 दिन की मियाद और टूटते सपने

एच-1बी वीजा धारक भारतीय टेक कर्मचारियों के सामने अमेरिका में 60 दिन की समयसीमा के कारण नौकरी और जीवन संकट गहरा रहा है, छंटनी, वीजा नियमों और भविष्य अनिश्चितता ने स्थिति चुनौतीपूर्ण बनाई है।

नई दिल्ली, 23मई।

एच-1बी वीजा पर अमेरिका में कार्यरत भारतीय तकनीकी कर्मचारियों के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती केवल नौकरी खोने की नहीं, बल्कि पूरे जीवन के अस्थिर हो जाने की बन गई है, क्योंकि बड़ी टेक कंपनियों में व्यापक छंटनी के बाद हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स पर अमेरिका छोड़ने का दबाव बढ़ गया है।

मेटा, गूगल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और लिंक्डइन जैसी प्रमुख कंपनियों में नौकरी कटौती के बाद हजारों भारतीय कर्मचारियों की स्थिति अनिश्चित हो गई है, और वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक 144 टेक कंपनियों द्वारा 1.10 लाख से अधिक कर्मचारियों की छंटनी की जा चुकी है, जिसका सर्वाधिक असर एच-1बी वीजा धारकों पर पड़ा है।

अमेरिकी आव्रजन नियमों के अनुसार नौकरी समाप्त होते ही 60 दिन की अवधि शुरू हो जाती है, जिसमें नई नौकरी हासिल कर वीजा ट्रांसफर करना अनिवार्य होता है, अन्यथा देश छोड़ना पड़ता है, और वित्त वर्ष 2025 में स्वीकृत 4,06,348 एच-1बी याचिकाओं में से 2,83,772 भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत रही है।

नियमों के अनुसार यह वीजा नियोक्ता द्वारा प्रायोजित होता है और नौकरी समाप्त होते ही इसका आधार समाप्त हो जाता है, जिसके बाद 60 दिन की छूट अवधि मिलती है, जो अंतिम कार्य दिवस से गिनी जाती है, और इस दौरान केवल तीन विकल्प रहते हैं—नई नौकरी के लिए ट्रांसफर, वीजा स्टेटस परिवर्तन या अमेरिका छोड़ना, अन्यथा व्यक्ति अवैध स्थिति में माना जाता है।

वर्तमान स्थिति में टेक क्षेत्र में नई भर्ती लगभग ठप है, स्टार्टअप निवेश में गिरावट आई है और बड़ी कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं, जिससे 60 दिन के भीतर नई नौकरी मिलना अत्यंत कठिन हो गया है।

अधिकांश भारतीय प्रोफेशनल्स 30 से 45 वर्ष की आयु के हैं और वर्षों से अमेरिका में कार्यरत हैं, जहां उन्होंने घर, परिवार और बच्चों की शिक्षा तक स्थापित कर ली है, लेकिन नौकरी जाने पर उनका पूरा जीवन ढांचा प्रभावित हो जाता है, साथ ही ग्रीन कार्ड प्रक्रिया भी लंबित हो जाती है।

पहले नौकरी समाप्त होने पर बी-2 या बी-1 वीजा में बदलाव का विकल्प उपयोग किया जाता था, लेकिन अब आव्रजन विभाग इस पर सख्ती बरत रहा है और कई मामलों में आवेदन खारिज या अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, क्योंकि इसे संभावित दुरुपयोग माना जा रहा है।

कंपनियों के लिए एच-1बी कर्मचारियों की छंटनी अपेक्षाकृत आसान हो गई है, क्योंकि अमेरिकी नागरिकों की तुलना में विदेशी कर्मचारियों पर कानूनी जिम्मेदारियां कम होती हैं और 60 दिन बाद वे स्वयं देश छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।

इस स्थिति ने भारत के नीति-निर्माताओं के लिए भी चिंता बढ़ा दी है, और सुझाव दिया जा रहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत में समयसीमा बढ़ाने का मुद्दा उठाया जाए, जबकि भारत लौटने वाले अनुभवी पेशेवरों को “ब्रेन गेन” के रूप में देखा जा सकता है और उनका उपयोग उभरते तकनीकी क्षेत्रों में किया जा सकता है।

यह पूरा संकट यह संकेत देता है कि एच-1बी वीजा स्थायी सुरक्षा नहीं है और भारतीय युवाओं को केवल अमेरिकी नौकरी पर निर्भर रहने की मानसिकता बदलनी होगी तथा वैकल्पिक अवसरों पर भी ध्यान देना होगा।

आज हजारों भारतीय परिवार 60 दिन की उल्टी गिनती के दबाव में हैं, जहां किसी के पास कुछ दिन शेष हैं तो किसी के पास कुछ सप्ताह, और यह स्थिति वैश्विक रोजगार संरचना में बड़े बदलाव का संकेत देती है, जिसमें अमेरिका अब शर्तों पर आधारित प्रतिभा नीति की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

भारतीय टेक प्रोफेशनल्स ने सिलिकॉन वैली के विकास में अहम योगदान दिया है, और अब आवश्यकता है कि भारत भी इन प्रतिभाओं को अवसर देकर उन्हें सशक्त बनाए, अन्यथा यह संकट केवल रोजगार नहीं बल्कि विश्वास के टूटने का कारण बन सकता है।

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