Washington, 20 मई ।
अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सैन्य कार्रवाई संबंधी शक्तियों को नियंत्रित करने वाला एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कर दिया गया है। मतदान में चार रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट्स का समर्थन किया, जबकि तीन रिपब्लिकन सांसद वोटिंग प्रक्रिया से अनुपस्थित रहे।
यह प्रस्ताव 50-47 के अंतर से मंजूरी प्राप्त कर चुका है, हालांकि इसे कानून बनने के लिए अभी कई संवैधानिक चरणों से गुजरना बाकी है। यदि यह विधेयक अंतिम रूप लेता है, तो ट्रम्प प्रशासन को ईरान के खिलाफ किसी भी युद्ध या सैन्य कार्रवाई को जारी रखने के लिए कांग्रेस की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
फिलहाल इस प्रस्ताव पर सीनेट में अंतिम मतदान होना शेष है। इसके बाद इसे रिपब्लिकन बहुमत वाले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से भी स्वीकृति लेनी होगी। इसके बावजूद यदि राष्ट्रपति ट्रम्प इसे वीटो करते हैं, तो उस वीटो को पलटने के लिए सीनेट और हाउस दोनों में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होगा, जो मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में कठिन माना जा रहा है।
सीनेट में मंगलवार शाम ईरान से जुड़े युद्ध और तनाव पर विस्तृत चर्चा आयोजित की गई। विपक्ष का कहना है कि युद्ध शुरू करने और सैन्य बल तैनात करने का अधिकार संसद के पास होना चाहिए, न कि केवल राष्ट्रपति के पास, और अमेरिकी संविधान भी इसी सिद्धांत का समर्थन करता है।
यह विधेयक डेमोक्रेट सीनेटर टिम केन द्वारा पेश किया गया, जिन्होंने बहस के दौरान कहा कि जब युद्धविराम पर बातचीत जारी है, ऐसे समय में राष्ट्रपति को अपनी रणनीति संसद के समक्ष स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं व्हाइट हाउस का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए निर्णय लिए हैं।
अमेरिकी कानून व्यवस्था के अनुसार कोई भी राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की अनुमति के केवल 60 दिनों तक सैन्य कार्रवाई चला सकता है। इसके बाद या तो अभियान समाप्त करना होता है, या कांग्रेस से अनुमति लेनी होती है, अथवा सेना की सुरक्षित वापसी के लिए अतिरिक्त 30 दिनों की अवधि का प्रावधान होता है।






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