मसूरी, 19 मई ।
पहाड़ों की रानी मसूरी को साहित्यिक पहचान दिलाने वाले विश्वप्रसिद्ध लेखक रस्किन बॉन्ड मंगलवार को 93 वर्ष के हो गए। इस बार उन्होंने अपना जन्मदिन देहरादून स्थित आवास पर परिवार के बीच बेहद सादगी से मनाया। स्वास्थ्य कारणों के चलते वह मसूरी नहीं पहुंच सके, जिससे उनके प्रशंसकों में हल्की निराशा देखने को मिली।
रस्किन बॉन्ड का नाम आते ही मसूरी की धुंध, बारिश, देवदार के जंगल और पहाड़ी जीवन की सादगी की तस्वीर उभर आती है। उन्होंने अपनी लेखनी के जरिए न केवल मसूरी को साहित्यिक पहचान दिलाई, बल्कि पहाड़ी जीवन की संवेदनाओं को भी दुनिया तक पहुंचाया। पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें मसूरी से देहरादून शिफ्ट किया गया है। परिवार के मुताबिक, उनका स्वास्थ्य फिलहाल स्थिर है और वह डॉक्टरों की निगरानी में हैं।
उनके पुत्र राकेश बॉन्ड ने बताया कि इस बार जन्मदिन घर पर ही सादगी के साथ मनाया गया। डॉक्टरों की सलाह के अनुसार फिलहाल उन्हें देहरादून में ही रखा गया है। हर वर्ष मसूरी माल रोड स्थित प्रसिद्ध पुस्तक दुकान पर उनके जन्मदिन को लेकर विशेष आयोजन होते थे, जहां देशभर से साहित्य प्रेमी उनसे मिलने और ऑटोग्राफ लेने पहुंचते थे।
रस्किन बॉन्ड अपने प्रशंसकों से आत्मीयता से मिलते और बच्चों के साथ खास बातचीत के लिए भी जाने जाते रहे हैं। इस बार उनके मसूरी नहीं पहुंचने से स्थानीय लोगों और पर्यटकों में मायूसी जरूर रही, लेकिन सभी ने उनके अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु जीवन की कामना की। सोशल मीडिया पर भी दिनभर उन्हें शुभकामनाएं देने का सिलसिला जारी रहा।
19 मई 1934 को हिमाचल प्रदेश के कसौली में जन्मे रस्किन बॉन्ड का बचपन पहाड़ों के बीच बीता। उन्होंने शिमला और देहरादून में शिक्षा प्राप्त की और कम उम्र में ही लेखन की दुनिया में कदम रख दिया। जॉन लेवेलिन रीस पुरस्कार मिलने के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली और फिर उन्होंने साहित्य जगत में अपनी अलग छाप छोड़ी।
रस्किन बॉन्ड की रचनाओं में प्रकृति, दोस्ती, अकेलापन और मानवीय भावनाओं की झलक मिलती है। उनकी प्रमुख पुस्तकों में ‘ब्लू अम्ब्रेला’, ‘टाइम स्टॉप्स एट शामली’, ‘अवर ट्रीज स्टिल ग्रो इन देहरादून’, ‘ए फ्लाइट ऑफ पिजन्स’ और ‘दिल्ली इज नॉट फार’ जैसी कृतियां शामिल हैं। उनकी कहानियों पर आधारित कई फिल्में और धारावाहिक भी बनाए जा चुके हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि रस्किन बॉन्ड केवल लेखक नहीं, बल्कि मसूरी की सांस्कृतिक पहचान हैं। उनकी रचनाओं ने देश-दुनिया के लोगों को पहाड़ों और प्रकृति से जुड़ने की नई दृष्टि दी है।






.jpg)






