सरकार व नीतियाँ
19 May, 2026

मानवाधिकार मामलों के त्वरित समाधान पर एनएचआरसी का बड़ा जोर

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने वर्चुअल सम्मेलन में मानवाधिकार उल्लंघन मामलों के त्वरित समाधान और डिजिटल समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया।

नई दिल्ली, 19 मई ।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य मानवाधिकार आयोगों, विशेष प्रतिवेदकों और पर्यवेक्षकों के साथ एक दिवसीय वर्चुअल सम्मेलन आयोजित कर मानवाधिकार मामलों के शीघ्र समाधान, संस्थागत समन्वय और डिजिटल व्यवस्था को मजबूत बनाने पर बल दिया। सम्मेलन की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने की।

सम्मेलन के दौरान न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने कहा कि देश का मानवाधिकार तंत्र अपनी प्रकृति में विशिष्ट है, जहां राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग कई मामलों में समान क्षेत्राधिकार के तहत कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि मामलों की पुनरावृत्ति रोकने, सूचनाओं के आदान-प्रदान को बेहतर बनाने और प्रभावी कार्यप्रणालियों को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने आयोगों को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत निर्धारित दायरे में कार्य करने की सलाह देते हुए क्षेत्राधिकार की स्पष्टता बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि अनावश्यक विवाद कम हों और सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर हो सके।

एनएचआरसी अध्यक्ष ने राज्य मानवाधिकार आयोगों से अपने कार्यों को डिजिटल प्रणाली से जोड़ने और एकीकृत एचआरसीनेट पोर्टल अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे मामलों के दोहराव पर रोक लगेगी और आयोगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक 23 राज्य मानवाधिकार आयोग इस डिजिटल प्रणाली से जुड़ चुके हैं, जबकि कुछ राज्यों में यह प्रक्रिया अभी बाकी है।

आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति बिद्युत रंजन सारंगी ने कहा कि एनएचआरसी और राज्य आयोगों के बीच संवाद समन्वय को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने हिरासत में मौत जैसे संवेदनशील मामलों में समयबद्ध कार्रवाई और आदेशों के प्रभावी पालन के लिए बेहतर संवाद की आवश्यकता जताई।

एनएचआरसी सदस्य विजया भारती सयानी ने प्रभावित समुदायों के साथ राज्य आयोगों की भागीदारी बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि विशेष पर्यवेक्षकों और प्रतिवेदकों के बीच मजबूत तालमेल से संस्थागत प्रभावशीलता को और मजबूती मिलेगी।

एनएचआरसी के महासचिव भरत लाल ने बताया कि आयोग को पिछले पांच वर्षों में 4.28 लाख शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें पुलिस द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन, महिलाओं के अधिकार, जेलों की स्थिति, श्रमिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और बाल अधिकारों से जुड़े मामले प्रमुख रहे हैं। उन्होंने हिरासत में मौत, मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों, हाथ से मैला ढोने से हुई मौतों और कमजोर वर्गों के पुनर्वास जैसे विषयों पर सक्रिय निगरानी की जरूरत बताई।

सम्मेलन में मानवाधिकार तंत्र को अधिक संसाधन, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और डिजिटल समन्वय उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। इसके साथ जेल सुधार, बाल संरक्षण, दिव्यांग अधिकार, मानसिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय न्याय और श्रमिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सुझाव साझा किए गए। सम्मेलन में कई राज्यों के मानवाधिकार आयोगों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

विवरण: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने वर्चुअल सम्मेलन में मानवाधिकार उल्लंघन मामलों के त्वरित समाधान और डिजिटल समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया।

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