काठमांडू, 18 मई।
नेपाल सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को उस समय अचानक अफरा-तफरी की स्थिति बन गई जब कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश ने प्रधान न्यायाधीश की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं को पंजीकृत करने का आदेश जारी किया।
आदेश जारी होते ही अदालत के मुख्य रजिस्ट्रार, रजिस्ट्रार और अन्य प्रशासनिक कर्मचारी अपने-अपने कार्यालय छोड़कर परिसर से गायब हो गए, जिसके चलते अदालत की कई प्रशासनिक शाखाएं खाली हो गईं।
जानकारी के अनुसार कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल ने अदालत प्रशासन को दोपहर एक बजे तक सभी लंबित याचिकाओं का पंजीकरण करने और उन्हें अगले दिन की सुनवाई सूची में शामिल करने का निर्देश दिया था।
इन याचिकाओं में डॉ. मनोज शर्मा को प्रधान न्यायाधीश पद के लिए की गई सिफारिश को चुनौती दी गई है, जिसे लेकर पहले प्रशासनिक स्तर पर पंजीकरण से इनकार किया गया था।
याचिकाकर्ताओं द्वारा लगातार प्रयासों के बावजूद याचिकाएं दर्ज नहीं हो पा रही थीं, जिसके बाद कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश के हस्तक्षेप के बाद दोपहर बाद इन्हें पंजीकृत कर लिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद वकीलों ने अदालत कर्मचारियों के कथित व्यवहार के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी शुरू कर दी है, जबकि मामले में अब न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
संवैधानिक परिषद द्वारा 8 मई को जस्टिस मनोज शर्मा के नाम की सिफारिश किए जाने के बाद यह विवाद शुरू हुआ था, जिसे वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत में चुनौती दी थी और प्रक्रिया को वरिष्ठता व परंपरा के खिलाफ बताया था।
अब यह मामला अदालत में विचाराधीन है, जिसमें यह तय किया जाएगा कि प्रशासनिक निर्णय को बरकरार रखा जाए या याचिकाओं को स्वीकार कर आगे की सुनवाई की जाए।




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