नई दिल्ली, 19 मई ।
पूर्वोत्तर क्षेत्रीय जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (एनईआरआईवाल्म) की शासी निकाय की छठी बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट और वित्त वर्ष 2024-25 के लेखा परीक्षण को स्वीकृति प्रदान की। साथ ही सिंचाई क्षेत्र प्रयोगशाला और प्रदर्शन फार्म की स्थापना का प्रस्ताव भी रखा गया।
गुवाहाटी में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने की, जिसमें उन्होंने बैठक से पूर्व संस्थान के नवनिर्मित अंतरराष्ट्रीय छात्रावास सह अतिथि गृह का वर्चुअल उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र की जल एवं भूमि संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक जल प्रबंधन, क्षमता निर्माण और राज्यों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि मंत्रालय एनईआरआईवाल्म को जल और भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में बताया गया कि संस्थान ने अपने प्रशिक्षण लक्ष्य से अधिक उपलब्धि हासिल की है, जिसमें वर्षभर में 71 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर 2800 से अधिक प्रतिभागियों को लाभ पहुंचाया गया।
इसके साथ ही एम.टेक और पीएचडी पाठ्यक्रमों के संचालन पर भी चर्चा की गई तथा बाह्य वित्तपोषित परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई, जिनमें असम में टिकाऊ सिंचाई विकास, ब्रह्मपुत्र जल मोड़ के आर्थिक प्रभाव, जल संचयन योजना और पूर्वोत्तर की पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियों पर अध्ययन शामिल हैं।
शासी निकाय में संस्थान के संविधान में संशोधन पर भी विचार किया गया, जिसमें उपलब्धि समीक्षा समिति की बैठक हर तीन वर्ष में कराने तथा तकनीकी सलाहकार समिति का नाम बदलकर शैक्षणिक सलाहकार समिति करने का प्रस्ताव शामिल था।
बैठक में छात्रों की छात्रवृत्ति सहायता, संकाय विकास, अनुसंधान क्षमता सुदृढ़ीकरण और जल संसाधन प्रबंधन में जलवायु एवं जीआईएस आधारित अध्ययन को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही ब्रह्मपुत्र घाटी में कटाव प्रभावित परिवारों की आजीविका संबंधी चुनौतियों और उनके पुनर्वास पर भी विचार किया गया।












