पश्चिम बंगाल
19 May, 2026

पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक सुधार तेज, ईंधन बचत और डिजिटल कार्यप्रणाली पर बड़ा फैसला

पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और सरकारी खर्च में कमी लाने के लिए ईंधन बचत, डिजिटल प्रणाली, ई-ऑफिस, स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता और कार्ययोजना तैयार करने सहित व्यापक निर्देश जारी किए हैं।

कोलकाता, 19 मई।

पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने और सरकारी व्यय में कटौती के लिए व्यापक सख्त कदम लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से सभी विभागों और जिला प्रशासन को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा हाल ही में ईंधन बचत, सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग तथा प्रशासनिक कार्यों में डिजिटल व्यवस्था के विस्तार पर दिए गए जोर के अनुरूप इस पूरी पहल को देखा जा रहा है।

जारी निर्देश में सभी विभागों को अनावश्यक ईंधन उपयोग में कमी लाने, डिजिटल प्रणालियों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने तथा स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने पर विशेष बल देने को कहा गया है, साथ ही प्रत्येक विभाग को अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्यों के आधार पर संरचित कार्ययोजना तैयार करनी होगी।

मुख्य सचिव ने प्रशासनिक सुधार के लिए सात प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है, जिनमें वर्चुअल बैठकों के उपयोग को बढ़ाना प्रमुख है, और यह निर्देश दिया गया है कि जहां संभव हो वहां भौतिक बैठकों के स्थान पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल मंचों का उपयोग किया जाए।

निर्देशों में यह भी उल्लेख किया गया है कि कार्य की गुणवत्ता प्रभावित किए बिना उपयुक्त परिस्थितियों में घर से काम करने की व्यवस्था पर भी विचार किया जा सकता है।

ईंधन बचत के तहत सरकारी यात्राओं में कटौती, वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, कार पूलिंग को बढ़ावा देने तथा सरकारी कार्यों में चरणबद्ध तरीके से विद्युत वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया है।

इसके साथ ही सरकारी कार्यालयों में बिजली और ऊर्जा संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए अनावश्यक विद्युत उपयोग रोकने तथा ऊर्जा दक्ष उपकरणों को अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।

डिजिटलीकरण को गति देने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली के विस्तार के माध्यम से कागजरहित प्रशासन लागू करने और डिजिटल फाइल प्रणाली को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है, जिससे कागज आधारित खर्च में कमी लाई जा सके।

नई नीति में सरकारी खरीद में स्थानीय एवं स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया है, जिसका उद्देश्य स्थानीय विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना बताया गया है।

साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग, अपशिष्ट प्रबंधन को सुदृढ़ करने, पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने और आपूर्ति व्यवस्था में सुधार के जरिए बर्बादी को कम करने पर भी बल दिया गया है।

इसके अतिरिक्त स्वस्थ एवं टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाने तथा स्थानीय रूप से उत्पादित खाद्य तेल और पर्यावरण अनुकूल कृषि उत्पादों, विशेषकर जैविक उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की बात भी कही गई है।

सरकार ने इन सभी निर्देशों के क्रियान्वयन के लिए समयसीमा निर्धारित करते हुए सभी विभागों और जिला प्रशासन को 22 मई 2026 तक कार्ययोजना प्रस्तुत करने तथा 1 जुलाई से मासिक प्रगति रिपोर्ट जमा करने के आदेश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को इस प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि अधीनस्थ कार्यालय इन सभी दिशा-निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन करें, जबकि इस आदेश की प्रति मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को भी भेजी गई है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार इन कदमों का उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ अनावश्यक खर्च को नियंत्रित कर राज्य के वित्तीय दबाव को कम करना है।

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