संपादकीय
19 May, 2026

पानी मांगा तो ड्यूटी छीन ली: मुख्यालय का फरमान — आरक्षक को बैठने की जगह नहीं, पर मुंह बंद रखो

आरक्षक द्वारा बुनियादी सुविधाओं की मांग करने पर ड्यूटी बदलने का मामला सामने आया है, जिससे पुलिस व्यवस्था की संवेदनशीलता, कार्यशैली और कर्मचारियों के प्रति रवैये पर गंभीर सवाल उठे हैं।

19 मई।
मध्य प्रदेश की व्यवस्था का चेहरा देखना हो तो मुख्यालय भोपाल का एक पत्र पढ़ लीजिए। एक आरक्षक ने सिर्फ इतना कहा कि 400-500 किलोमीटर दूर से आने वाले पुलिसकर्मियों को बैठने की जगह और पीने का पानी मिल जाए। बस इतनी सी “बगावत” पर उसकी ड्यूटी बदल दी गई। यही है हमारा प्रशासन — ऊपर वालों के लिए एसी चेम्बर, नीचे वालों के लिए धूप में खड़े रहने का हुक्म। सवाल पूछना गुनाह हो गया है।
एक थाने के आरक्षक ने 11 मई 2026 को मुख्यालय भोपाल को एक सादा आवेदन दिया। उसमें लिखा था कि दूर-दराज से आने वाले पुलिसकर्मियों को प्रकरण जमा करने में घंटों लग जाते हैं, लेकिन बैठने की जगह नहीं है और पीने का पानी तक नहीं मिलता। क्या यह मांग अनुचित थी? क्या यह कोई विशेष सुविधा थी? नहीं, यह तो न्यूनतम मानवीय शिष्टाचार है। लेकिन भोपाल के निदेशक कार्यालय को यह बात नागवार गुजरी। जवाब में जिले के एसपी को पत्र भेज दिया गया कि “भविष्य में प्रकरण जमा कराने के लिए किसी अन्य आरक्षक को भेजा जाए।” यानी समस्या हल नहीं करनी, बल्कि समस्या उठाने वाले को ही हटा दो।
ऊपर वीवीआईपी, नीचे बेहाल — यही इस व्यवस्था का सच है। विभाग के अधिकारी कार से आते हैं, ऑफिसर्स मैस में ठहरते हैं और एसी कमरों में बैठते हैं। उनके लिए हर जगह विशेष इंतजाम हैं। लेकिन जब बात 500 किलोमीटर सफर करके आने वाले आरक्षक की आती है तो जवाब मिलता है कि “किसी ने शिकायत नहीं की।” यह कितना बड़ा झूठ है। प्रदेशभर के हजारों पुलिसकर्मी हर महीने मुख्यालय के चक्कर लगाते हैं। गर्मी में 45 डिग्री तापमान पर वर्दी में घंटों खड़े रहते हैं। गला सूख जाता है, लेकिन पानी तक नहीं मिलता। और जब कोई एक जवान बोल पड़ता है तो उसे “अनुशासनहीन” करार दे दिया जाता है। यह दोहरा चरित्र नहीं तो और क्या है?
पत्र की भाषा ही मानसिकता उजागर कर देती है। उसमें एक लाइन भी नहीं कि “हम व्यवस्था सुधारेंगे।” न माफी, न आश्वासन, सिर्फ अप्रत्यक्ष धमकी — अगली बार तुम्हें नहीं भेजेंगे। मतलब साफ है कि मुख्यालय के लिए आरक्षक कोई इंसान नहीं, बल्कि फाइल ले जाने वाली मशीन है। मशीन को दर्द नहीं होता, प्यास नहीं लगती, थकान नहीं होती, इसलिए उसे बैठने की जरूरत भी नहीं। यही मानसिकता बताती है कि पुलिस महकमे में ऊपर बैठे लोग जमीनी हकीकत से कितने कट चुके हैं।
अगर यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल न होता तो शायद यह मामला भी फाइलों में दब जाता। हजारों आरक्षक रोज ऐसी ही जिल्लत झेलते हैं, लेकिन बोलते नहीं, क्योंकि बोलने की सजा तुरंत मिलती है — ड्यूटी बदल दी जाती है, डांट पड़ती है, प्रमोशन रुक जाता है। लेकिन इस बार मामला सार्वजनिक हो गया और जनता ने देख लिया कि “जनता का मित्र” कहे जाने वाले पुलिसकर्मी खुद अपनी ही व्यवस्था के हाथों बेइज्जत हो रहे हैं।
अब तक विभाग या प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट सफाई नहीं आई। न यह कहा गया कि मांग गलत थी, न यह बताया गया कि सुविधा कब मिलेगी। यह चुप्पी ही सबसे बड़ा जवाब है। अगर कार्यालय को लगता है कि बैठने और पानी जैसी सुविधाओं की जरूरत नहीं, तो सामने आकर यह बात कहनी चाहिए। लेकिन चुपके से पत्र लिखकर आरक्षक को हटवाना कायरता है।
यह सिर्फ एक जिले का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की बीमारी है। कई थानों में बैरक नहीं, शौचालय नहीं, पीने का पानी नहीं। ड्यूटी 12 से 14 घंटे की, लेकिन आराम की कोई व्यवस्था नहीं। और जब कोई जवान अपनी समस्या उठाता है तो उसे “मनोबल गिराने वाला” कह दिया जाता है। आखिर यह कैसा मनोबल है जो पानी मांगने से टूट जाता है? असल में मनोबल तब टूटता है, जब ऊपर बैठे लोग नीचे वालों को इंसान समझना बंद कर देते हैं।
प्रश्न सीधा है — क्या मध्य प्रदेश पुलिस अपने ही जवानों को बैठने और पानी की सुविधा नहीं दे सकती? अगर नहीं दे सकती तो डीजीपी और गृह विभाग को बताना चाहिए कि बजट कहां जा रहा है। और अगर दे सकती है तो फिर ऐसा पत्र क्यों लिखा गया? लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी कर्मचारी को अपनी समस्या रखने का अधिकार है। उसे दबाना, डराना और ड्यूटी से हटाना किसी भी स्वस्थ प्रशासनिक संस्कृति के खिलाफ है।
आरक्षक ने कोई अपराध नहीं किया। उसने सिर्फ वह कहा, जो हजारों जवानों के मन में है। उसकी “गलती” सिर्फ इतनी थी कि उसने आईना दिखाने की हिम्मत की। अब फैसला व्यवस्था को करना है कि वह अपने कर्मचारियों को सम्मान देगी या सवाल पूछने वालों को सजा देती रहेगी। क्योंकि जिस जवान को आप धूप में खड़ा रखेंगे, वही एक दिन आपकी व्यवस्था को भी धूप में खड़ा कर देगा।
 
|
आज का राशिफल

इस सप्ताह आपके लिए अनुकूल समय है। पेशेवर मोर्चे पर सफलता मिलने के योग हैं। व्यक्तिगत जीवन में भी सुकून और संतोष रहेगा।
भाग्यशाली रंग: लाल
भाग्यशाली अंक: 9
मंत्र: "ॐ हं राम रामाय नमः"

आज का मौसम

भोपाल

30° / 41°

SUNNY

ट्रेंडिंग न्यूज़