देश के पूर्वी राज्यों की कृषि क्षमता को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि यहां की उपजाऊ भूमि, पर्याप्त जल उपलब्धता, विविध प्रकार की मिट्टी, अनुकूल जलवायु और किसानों की मेहनत मिलकर इसे कृषि विकास का मजबूत आधार बना सकती है। उन्होंने कहा कि यदि योजनाबद्ध तरीके से और प्रयास किए जाएं तो पूर्वी भारत देश के कृषि विकास का ग्रोथ इंजन बन सकता है।
भुवनेश्वर में आयोजित ‘पूर्वांचल क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन-2026’ में ओडिशा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल सहित पूर्वी भारत के राज्यों के कृषि विकास और किसानों के कल्याण के लिए विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की गई। इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री तथा विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों ने सहभागिता की।
सम्मेलन के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री ने ओडिशा के कृषि क्षेत्र में हुई प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि इस वर्ष धान खरीद के क्षेत्र में राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर बल देते हुए किसानों से अपनी कम से कम बीस प्रतिशत भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। साथ ही उन्होंने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता पर पड़ रहे प्रभाव पर चिंता जताई और नकली खाद व कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही।
राज्य के मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्यधिक रासायनिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और जैविक खेती भविष्य की आवश्यकता बनती जा रही है। उन्होंने बताया कि जगन्नाथ मंदिर के महाप्रसाद में अब राज्य के जैविक चावल का उपयोग किया जा रहा है, जो गर्व का विषय है।
उन्होंने आगे बताया कि सरकार ब्लॉक स्तर पर पारंपरिक और विलुप्त होती फसलों के पुनर्जीवन के लिए विशेष प्रयास कर रही है। किसानों को आर्थिक सहायता देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जा रहा है, जिससे लाखों किसान लाभान्वित हो रहे हैं। इसके साथ ही कृषि अवसंरचना को मजबूत करने के लिए कोल्ड स्टोरेज और अन्य सुविधाओं के विस्तार की योजना पर कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि उद्योग को बढ़ावा देने के लिए निवेश पर सब्सिडी की व्यवस्था की गई है और किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। उन्होंने यह भी बताया कि कई जिलों में कॉफी बागानों का विस्तार किया जा रहा है, जिससे राज्य की कृषि पहचान को नई दिशा मिल रही है।
उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत में कृषि उत्पादन बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं और यह सम्मेलन राज्यों के बीच बेहतर कृषि तकनीकों और अनुभवों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। इससे तैयार होने वाला रोडमैप देश के पूर्वोदय मिशन को मजबूती देगा और क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।












