नई दिल्ली, 20 मई ।
विश्व हिंदू परिषद ने सड़कों पर नमाज पढ़ने के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे केवल धार्मिक आचरण नहीं बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय बताया है। संगठन का कहना है कि यह इबादत नहीं बल्कि शक्ति प्रदर्शन का माध्यम है और इस पर राज्य सरकारों को सख्त रोक लगानी चाहिए।
संगठन के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री ने कहा कि सड़कों पर नमाज पढ़ना केवल इबादत नहीं बल्कि फसाद का कारण है। उनके अनुसार यह न केवल संविधान के खिलाफ है बल्कि मानवता और धार्मिक मूल्यों के भी विरुद्ध है। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा पहले ही ऐसे मामलों में रोक के आदेश दिए जा चुके हैं और सर्वोच्च न्यायालय भी इस विषय पर संकेत दे चुका है।
उन्होंने आगे कहा कि यह मुद्दा केवल कुछ मिनटों का नहीं है, बल्कि इससे सार्वजनिक जीवन प्रभावित होता है। उनके अनुसार रेलवे स्टेशनों और प्रमुख मार्गों पर नमाज के कारण ट्रेन और यातायात बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे आम लोगों, स्कूली बच्चों और मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई धार्मिक ग्रंथों में सड़क पर नमाज पढ़ने से रोका गया है और कई देशों में इस पर प्रतिबंध भी है। ऐसे में भारत में इस तरह की परंपरा को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब धार्मिक स्थल उपलब्ध हैं तो सड़क पर नमाज की आवश्यकता क्यों पड़ती है।
संगठन की ओर से यह भी कहा गया कि कुछ स्थानों पर सड़कें रोककर नमाज पढ़ने की घटनाओं को लेकर समाज में असंतोष की स्थिति बनी और इसके खिलाफ आंदोलन भी हुए। इस दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि बड़ी संख्या में लोगों को एकत्र कर सार्वजनिक मार्गों पर नमाज पढ़ी जाती है, जबकि आसपास के धार्मिक स्थल खाली रहते हैं।
विश्व हिंदू परिषद ने इसे सामाजिक दबाव बनाने और शक्ति प्रदर्शन का प्रयास बताते हुए राज्य सरकारों से अपील की है कि वे ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई करें और न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराएं। साथ ही यह भी कहा गया कि धार्मिक नेताओं को समाज को कानून का पालन करने की प्रेरणा देनी चाहिए।




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