मुजफ्फराबाद, 09 जून।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पिछले कुछ दिनों से महंगाई, बिजली संकट और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर शुरू हुआ शांतिपूर्ण आंदोलन अब व्यापक हिंसक विद्रोह में बदल गया है, जहां ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व में लंबे समय से चल रहे आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों के संघर्ष के बीच हालात उस समय और बिगड़ गए जब सरकार द्वारा 6 जून को संगठन पर प्रतिबंध लगाकर उसे आतंकवादी घोषित किया गया और 9 जून की हड़ताल व चक्का जाम को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की गई,
जिसके बाद रावलकोट में एक प्रदर्शनकारी नेता की मौत के बाद अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण झड़प हुई और कई स्थानों पर पुलिस चौकियों को आग के हवाले कर दिया गया,
रावलकोट, पुंछ और मुजफ्फराबाद में इंटरनेट व मोबाइल सेवाएं बंद कर दी गईं और पूरे क्षेत्र में कर्फ्यू जैसे हालात बन गए,
वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिजली उत्पादन के बावजूद उन्हें उसका लाभ नहीं मिल रहा, महंगाई और आटे की कमी से जनता परेशान है तथा पिछले समझौते के वादे पूरे नहीं हुए और विधानसभा में शरणार्थियों के लिए सीटें आरक्षित किए जाने को लेकर राजनीतिक साजिश के आरोप लगाए जा रहे हैं,
इस हिंसा में अब तक 11 से 30 लोगों की मौत और 200 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना है वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटेन के कई सांसदों ने पाकिस्तान में मानवाधिकार स्थिति पर चिंता जताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।














