सीमावर्ती जिले के एक साहब और दूसरे जिले के उनके समकक्ष के बीच की नजदीकियां लंबे समय से चर्चा का विषय थीं। मीटिंग और दौरों के बहाने मुलाकातों का सिलसिला भी चलता रहा।
लेकिन पिछले दिनों मामला सार्वजनिक होने की कगार पर पहुंच गया। जैसे-तैसे बात संभाल ली गई और पर्दा गिरा दिया गया। आखिर मामला सिर्फ दो अधिकारियों का नहीं, दो परिवारों की साख का भी था। अब दोनों ओर खामोशी है, लेकिन गलियारों में कानाफूसी पहले से ज्यादा तेज है।














