कोलकाता, 09 जून।
राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पाल अपने तीन दिवसीय उत्तर बंगाल दौरे के दौरान मंगलवार को जलपाईगुडी पहुंचीं। उन्होंने विभिन्न विकास परियोजनाओं, अन्नपूर्णा योजना, अवैध कब्जों और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखी। दौरे के पहले दिन उत्तरकन्या में कार्यक्रम हुआ। दूसरे दिन दार्जिलिंग और कालिम्पोंग में बैठकों में हिस्सा लिया गया। मंगलवार सुबह जलपाईगुड़ी पहुंचने पर उन्होंने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, पिछले वर्ष जलजमाव से प्रभावित क्षेत्रों और डंपिंग ग्राउंड की स्थिति का निरीक्षण किया।
अन्नपूर्णा योजना को लेकर मंत्री ने बताया कि आवेदन पत्र नगर निगम, बोरो, पंचायत और ब्लॉक कार्यालय से प्राप्त किए जा सकते हैं। प्रत्येक महिला को अलग-अलग फॉर्म लेने की आवश्यकता नहीं है। एक परिवार के लिए एक ही आवेदन पत्र पर्याप्त है। एक ही फॉर्म में परिवार की कई महिलाओं के बैंक खाते का विवरण दर्ज करने की व्यवस्था है, जिससे मां, बेटी और बहू सहित सभी पात्र सदस्य शामिल हो सकेंगी। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थियों के खाते में राशि भेजी जाएगी।
महिलाओं के लिए प्रस्तावित नि:शुल्क बस यात्रा सुविधा पर उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं को राहत पहुंचाना है। भविष्य में ऐसे लोगों की पहचान करने पर विचार किया जा सकता है जिन्हें इस सुविधा की वास्तविक आवश्यकता नहीं है ताकि योजना का लाभ सही पात्रों तक पहुंचे।
अवैध कब्जों और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि केवल जमीन ही नहीं, बल्कि तालाबों और अन्य सरकारी संपत्तियों पर अवैध निर्माण के मामलों की भी जांच होगी। शहरी स्थानीय निकायों को निर्देश दिया गया है कि संदिग्ध मामलों में नोटिस जारी कर जमीन के वैध दस्तावेज मांगे जाएं। दस्तावेज सही होने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन अवैध कब्जा साबित होने पर कानून के अनुसार कदम उठाए जाएंगे। सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में विभिन्न भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं। विधानसभा में विपक्षी दल के नेता के चयन पर उठे विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों को यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित हस्ताक्षर वास्तविक हैं या नहीं।
उत्तर बंगाल के चाय बागान क्षेत्रों में मानव तस्करी और महिलाओं की सुरक्षा पर मंत्री ने कहा कि उत्तरकन्या की बैठक में इस पर विशेष चर्चा की गई। रोकथाम उपचार से बेहतर है। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। परिवारों और विशेष रूप से महिलाओं को जागरूक किया जाएगा ताकि रोजगार के नाम पर किसी प्रलोभन का शिकार न हों। स्वयं सहायता समूहों और सामाजिक संगठनों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा ताकि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ सुरक्षा संबंधी जागरूकता बढ़ाई जा सके।














