भोपाल, 09 जून।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शासकीय सेवाओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर बड़ा निर्णय लेते हुए दो बच्चों की अधिकतम सीमा संबंधी प्रावधान वाले प्रारूप नियम को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही इस प्रारूप को तत्काल पोर्टल से हटाने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा प्रस्तावित मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों में दो से अधिक जीवित संतान वाले अभ्यर्थियों को शासकीय सेवा के लिए अपात्र मानने से संबंधित प्रावधान शामिल किया गया था। मुख्यमंत्री ने इस विषय पर संज्ञान लेते हुए संबंधित प्रारूप को निरस्त करने का निर्णय लिया।
वर्ष 2001 में लागू की गई व्यवस्था के तहत 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक जीवित संतान रखने वाले उम्मीदवारों को शासकीय सेवाओं की सीधी भर्ती और विभागीय नियुक्तियों के लिए अयोग्य माना जाता था। इसके अलावा मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 में भी दो से अधिक बच्चों को कदाचार की श्रेणी में शामिल किया गया था।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रस्तावित मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों के प्रारूप से दो से अधिक जीवित संतान होने पर शासकीय सेवा में अपात्रता से जुड़े सभी प्रावधानों को हटाकर नया प्रारूप विधिवत तैयार किया जाए। साथ ही वर्तमान मसौदे को तत्काल प्रभाव से पोर्टल से हटाने की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
राज्य सरकार के इस फैसले को शासकीय सेवाओं से जुड़े अभ्यर्थियों और कर्मचारियों के हित में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।















