नई दिल्ली, 09 जून।
गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किए गए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) ने मंगलवार को अपने 10 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने ‘पीएमएसएमए के 10 साल - देखभाल का एक दशक’ अभियान का शुभारंभ किया और 75 रुपये का स्मारक सिक्का तथा 5 रुपये का विशेष डाक टिकट जारी किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू की गई यह पहल देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने में बेहद प्रभावी साबित हुई है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के कारण गर्भवती महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में ऐतिहासिक सुधार दर्ज किया गया है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1990 के बाद से भारत में मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की कमी आई है, जो वैश्विक औसत 48 प्रतिशत से काफी बेहतर है। इसके अलावा पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत और नवजात मृत्यु दर में 70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार संस्थागत प्रसव की दर बढ़कर 90.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि प्रसव पूर्व जांच का दायरा 95.9 प्रतिशत हो चुका है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और जनजागरूकता में वृद्धि का परिणाम है।
इस अवसर पर स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले एक दशक में अभियान के तहत 7.5 करोड़ से अधिक प्रसव पूर्व जांचें की गईं। साथ ही करीब 1.2 करोड़ उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान कर समय पर उपचार सुनिश्चित किया गया।
उन्होंने कहा कि देशभर में 9,000 से अधिक निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता इस अभियान से जुड़े हैं, जिससे दूरस्थ और आकांक्षी जिलों में भी विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बढ़ी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 9 जून से देशभर में विशेष जागरूकता और आउटरीच कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक गर्भवती महिलाएं अभियान के तहत उपलब्ध नौ निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।















