नई दिल्ली, 09 जून।
राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 के क्रियान्वयन और निगरानी के लिए गठित राष्ट्रीय स्तर की समिति की पहली बैठक मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित की गई। बैठक में नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केंद्र सरकार, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सहकारी संस्थाओं के बीच समन्वित कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक की अध्यक्षता सहकारिता मंत्रालय के सचिव आशीष कुमार भूटानी ने की। उन्होंने कहा कि मजबूत, पारदर्शी और आधुनिक सहकारी संस्थाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेंगी तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
भूटानी ने कहा कि यह नीति सहकारी संस्थाओं को पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, पेशेवर रूप से संचालित और सदस्य-केंद्रित आर्थिक इकाइयों में बदलने के लिए व्यापक ढांचा प्रदान करती है। उन्होंने सभी हितधारकों से इसके उद्देश्यों को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने का आह्वान किया।
बैठक में नीति के छह प्रमुख स्तंभों पर चर्चा की गई, जिनमें सहकारी ढांचे को मजबूत करना, संस्थाओं को प्रतिस्पर्धी बनाना, भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना, समावेशिता को बढ़ाना, नए क्षेत्रों में सहकारिता का विस्तार करना तथा युवाओं को सहकारी आंदोलन से जोड़ना शामिल है।
समिति ने पंचायत राज मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग सहित विभिन्न मंत्रालयों के साथ समन्वित कार्ययोजना पर भी चर्चा की।
बैठक में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) को बहुउद्देशीय सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने, प्रत्येक जिले में आदर्श सहकारी गांव स्थापित करने, सभी पंचायतों तक सहकारी संस्थाओं की पहुंच बढ़ाने, डेयरी एवं मत्स्य सहकारी समितियों के विस्तार तथा डिजिटल प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ करने जैसे विषयों की समीक्षा की गई।
इसके अलावा राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस, पीएसीएस के कंप्यूटरीकरण, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना तथा राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड, राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
बैठक में महिलाओं, युवाओं और छोटे किसानों की भागीदारी बढ़ाने, सहकारी संस्थाओं को नए बाजारों से जोड़ने तथा सदस्यता विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। नीति का लक्ष्य वर्ष 2035 तक सहकारी क्षेत्र की सदस्यता को 50 करोड़ तक पहुंचाना और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में इसके योगदान को तीन गुना करना है।
समिति ने कहा कि इस नीति का सफल क्रियान्वयन केंद्र, राज्यों, सहकारी संस्थाओं और सभी संबंधित हितधारकों की सक्रिय भागीदारी से सुनिश्चित किया जाएगा।














