कोलकाता, 09 जून।
पश्चिम बंगाल सरकार ने दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर के नाम में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए इसे अब आधिकारिक रूप से ‘श्री श्री जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र’ नाम दिया है। इससे पहले यह परिसर ‘श्री श्री जगन्नाथ सांस्कृतिक धाम’ के नाम से जाना जा रहा था। सरकार के इस फैसले को लंबे समय से चल रहे नामकरण विवाद को समाप्त करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस विषय पर पश्चिम बंगाल और ओडिशा के बीच हुए संवाद के बाद नाम परिवर्तन का निर्णय लिया गया। बताया गया है कि इस प्रक्रिया में पुरी से सांसद संबित पात्रा ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और ओडिशा सरकार की ओर से भेजे गए सुझावों पर भी विचार किया गया।
दीघा परियोजना को लेकर ‘धाम’ शब्द के उपयोग पर पिछले कुछ समय से धार्मिक और राजनीतिक स्तर पर बहस चल रही थी। एक पक्ष का मानना था कि यह शब्द केवल परंपरागत और प्राचीन तीर्थस्थलों के लिए प्रयुक्त होना चाहिए, जबकि दूसरा पक्ष इसे आस्था और धार्मिक महत्व के आधार पर व्यापक रूप से स्वीकार्य मानता रहा है।
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि आधिकारिक अभिलेखों में इस परिसर को मूल रूप से सांस्कृतिक केंद्र के रूप में दर्ज किया गया था। सरकार का मत है कि ‘धाम’ शब्द के प्रयोग से अनावश्यक विवाद पैदा हुआ, इसलिए अब इसे सभी आधिकारिक दस्तावेजों से हटाया जाएगा।
सरकार ने यह भी बताया कि हाल के दिनों में धार्मिक प्रतिनिधियों के साथ विभिन्न स्तरों पर चर्चा हुई थी, जिसमें नामकरण और परिसर की पहचान से जुड़े पहलुओं पर विचार किया गया। राज्य सरकार ने दोहराया कि वह सनातन परंपराओं के सम्मान के प्रति प्रतिबद्ध है और किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं रहने देना चाहती।
इस विवाद के दौरान मंदिर निर्माण और मूर्तियों में प्रयुक्त सामग्री को लेकर भी कई सवाल उठे थे। कुछ आरोपों में दावा किया गया था कि पुरी जगन्नाथ मंदिर के नवकलेवर से जुड़े पवित्र नीमकाष्ठ के अवशेषों का उपयोग दीघा में किया गया है। हालांकि, इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मामले ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बीच धार्मिक एवं प्रशासनिक संवेदनशीलता को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया था। विपक्षी दलों ने भी इस विषय पर सरकार को घेरा, लेकिन राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि नाम परिवर्तन का उद्देश्य केवल विवाद समाप्त करना और परियोजना को सांस्कृतिक पहचान देना है।
फिलहाल प्रशासन नए नाम के अनुरूप परिसर को एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे की प्रक्रिया पर काम कर रहा है।















