जिनेवा, 09 जून।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इबोला के बढ़ते प्रकोप पर गहरी चिंता जताई है। कांगो में इस बीमारी से अब तक 515 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं और 91 लोगों की जान जा चुकी है। वहां संक्रमण की मृत्यु दर 17.7 प्रतिशत दर्ज की गई है, हालांकि वास्तविक आंकड़े इससे अधिक हो सकते हैं।
कांगो के 25 'हेल्थ जोन' इस महामारी की चपेट में हैं, जिसमें 'इतूरी' प्रांत सबसे ज्यादा प्रभावित है। लगातार जारी हिंसा और असुरक्षा के कारण स्वास्थ्य टीमों को काम करने में काफी बाधाएं आ रही हैं। इससे निगरानी का कार्य प्रभावित हुआ है और वायरस के फैलने का खतरा बढ़ गया है।
युगांडा में भी 19 मामले सामने आए हैं और दो मौतें हुई हैं। अच्छी बात यह है कि वहां बीमारी आम जनता में नहीं फैली है। प्रभावित लोगों में 70 प्रतिशत कांगो के नागरिक हैं जो इलाज के लिए आए थे। एक संक्रमित व्यक्ति के यूएई की यात्रा करने की खबर भी मिली थी, लेकिन वहां संक्रमण का कोई खतरा नहीं पाया गया।
इस स्थिति से निपटने के लिए डब्ल्यूएचओ और अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल ने एक साझा तैयारी योजना शुरू की है। इसके तहत रोकथाम के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से 51.8 करोड़ डॉलर की वित्तीय मदद की मांग की गई है।
बुन्दिबुग्यो वायरस जानवरों से इंसानों में फैलता है और चमगादड़ इसके मुख्य स्रोत हैं। शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से यह एक इंसान से दूसरे में फैलता है। बुखार, थकान और सिरदर्द जैसे लक्षणों से शुरू होकर यह गंभीर रूप धारण कर लेता है। फिलहाल इसकी कोई विशेष दवा उपलब्ध नहीं है, इसलिए आइसोलेशन ही बचाव का मुख्य तरीका है।
डब्ल्यूएचओ ने कांगो में जोखिम को ‘बेहद उच्च’ और सीमावर्ती देशों में ‘उच्च’ माना है, लेकिन अभी यात्रा या व्यापार पर किसी प्रतिबंध की सलाह नहीं दी है।













