मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के औचक निरीक्षण और प्रशासनिक कसावट की कवायद के बाद कई अधिकारियों की कुर्सियां तो चली गईं, लेकिन कुछ साहब अब भी मंत्रालय में बिना काम के विराजमान हैं।
तनख्वाह समय पर, सरकारी गाड़ी जस की तस और सुविधाओं में कोई कमी नहीं। बस काम नाम की चीज गायब है।अब मंत्रालय के गलियारों में फुसफुसाहट यही है कि यह प्रशासनिक सजा है या सरकारी खर्च पर आराम फरमाने का सुनहरा मौका।














