कोलकाता, 09 जून।
पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार को सत्ता संभाले एक महीना पूरा हो गया है। इस संक्षिप्त अवधि में प्रशासन ने राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में कई बड़े बदलावों की नींव रखी है। नौ मई को शपथ लेने के बाद से ही सरकार ने भ्रष्टाचार और अवैध घुसपैठियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है।
सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अन्नपूर्णा योजना लागू की है। इसके तहत करीब 32 लाख महिलाओं के बैंक खातों में तीन-तीन हजार रुपये भेजे गए हैं। साथ ही, सरकारी बसों में महिलाओं की मुफ्त यात्रा की सुविधा भी शुरू की गई है, जिसे लेकर काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया है।
सरकार का मुख्य ध्यान भ्रष्टाचार पर प्रहार करने पर रहा है। पूर्व मंत्रियों और प्रभावशाली नेताओं समेत कई लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। शिक्षक भर्ती घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियां सक्रिय हैं। साथ ही, भ्रष्टाचार की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में विशेष समिति के गठन का निर्णय लिया गया है।
सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अवैध घुसपैठ पर कड़ी नजर रखी जा रही है। भारत-बांग्लादेश सीमा पर तारबंदी के लिए जमीन सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकार के दावों के अनुसार, पिछले एक महीने में लगभग पांच हजार घुसपैठिए वापस लौट चुके हैं और यह प्रक्रिया अभी जारी है।
राज्य में केंद्र की प्रमुख योजनाओं को भी तेजी से धरातल पर उतारा जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना लागू करने के समझौते के साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं और जन औषधि केंद्रों के विस्तार पर जोर दिया गया है। औद्योगिक विकास के लिए गौतम अडानी के पुत्र करण अडानी और एलएंडटी प्रमुख एस एन सुब्रह्मण्यन के साथ बैठकें हुई हैं।
रेलवे मंत्री के साथ चर्चा के बाद राज्य में एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। वहीं, सरकारी कर्मचारियों को राहत देते हुए महंगाई भत्ते के भुगतान और सातवें वेतन आयोग के गठन का एलान किया गया है। भर्ती में पारदर्शिता लाने के लिए आवेदन की आयु सीमा में भी पांच वर्ष की वृद्धि की गई है।
इन तमाम कदमों के बीच सरकार को विपक्षी विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। अवैध अतिक्रमण हटाने और बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने इसे राजनीतिक बदले की भावना करार दिया है। वहीं, छोटे व्यापारियों ने पुनर्वास न मिलने पर अपनी नाराजगी जताई है। सत्ताधारी दल का तर्क है कि राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिए यह कड़ाई अपरिहार्य है।














