काठमांडू, 19 मई।
भारत द्वारा चीनी निर्यात पर रोक लगाए जाने के बाद नेपाल के जूस, बिस्कुट और चॉकलेट उद्योग से जुड़े व्यवसायी संकट में हैं। उद्योगपतियों ने चेतावनी दी है कि निर्यात प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहने पर इन उद्योगों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
व्यवसायियों का कहना है कि नेपाल में चीनी का घरेलू उत्पादन पर्याप्त नहीं है, इसलिए सरकार को समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। फिलहाल स्टॉक मौजूद होने के कारण उद्योग सामान्य स्थिति में हैं, लेकिन यदि प्रतिबंध लंबा चला तो संकट गहरा सकता है। भारत ने कम उत्पादन का हवाला देते हुए चीनी निर्यात पर रोक लगाई है।
सीमावर्ती बाजारों में हाल में चीनी का खुदरा मूल्य भारत में 65-70 रुपये प्रति किलो और नेपाल में 90-100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुका है। चालू आर्थिक वर्ष में नेपाल ने अब तक लगभग 70 हजार मीट्रिक टन चीनी का आयात किया है। चॉकलेट और बिस्कुट उद्योग के व्यवसायी महेश जाजु ने बताया कि भारत के निर्यात प्रतिबंध का असर करीब पांच महीने बाद दिखाई देगा, जिससे दशैं और तिहार के त्योहारों में चीनी की कमी हो सकती है।
उद्योगपति सगुन बोहरा के अनुसार भारत में अनियमित बारिश और प्रतिकूल मौसम से गन्ना उत्पादन घट गया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल उद्योग बंद नहीं होंगे, लेकिन समय के साथ स्थिति गंभीर हो सकती है। उद्योग परिसंघ कोशी के अध्यक्ष पवन सारडा ने कहा कि नेपाली उत्पादन कुछ महीनों तक स्थिति संभाल सकता है, लेकिन इसके बाद संकट बढ़ सकता है।
महेश जाजु ने कहा कि जूस, बिस्कुट, कन्फेक्शनरी और चॉकलेट उद्योग, जो चीनी पर निर्भर हैं, सबसे अधिक प्रभावित होंगे। तीसरे देशों से आयात महंगा होने के कारण संकट बढ़ रहा है। पवन सारडा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय ढुलाई खर्च बढ़ा है और जब तक नेपाल सरकार कस्टम शुल्क कम नहीं करती, तब तक तीसरे देशों से आयात मुश्किल रहेगा। उद्योगपतियों ने सरकार से आग्रह किया है कि तीसरे देशों से चीनी आयात के लिए आवश्यक कदम तुरंत उठाए जाएं।






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