विश्वभर में फर्रुखाबाद तबला घराने की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले चीनी ग्रान मोहल्ला, फर्रुखाबाद के पूर्व निवासी तथा इस घराने के खलीफा और प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद साबिर खां का हृदयाघात से निधन हो गया। वे 67 वर्ष के थे और गुरुवार 14 मई की सुबह तबीयत बिगड़ने पर उन्हें कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनका जन्म 4 दिसंबर 1959 को रामपुर में हुआ था। बाद में उनके पिता उस्ताद करामतउल्लाह खां रामपुर से कोलकाता आकर बस गए और तभी से यह परिवार कोलकाता के राजारहाट क्षेत्र में निवास कर रहा था।
उस्ताद साबिर खां आने वाले 16 और 17 मई को कोलकाता में अपने दादा उस्ताद मसीत खां की स्मृति में दो दिवसीय संगीत सम्मेलन ‘नौ बहार’ आयोजित करने की तैयारी में थे, लेकिन उससे पहले ही यह दुखद घटना घट गई।
वे फर्रुखाबाद घराने के संस्थापक उस्ताद हाजी विलायत अली खां के प्रपौत्र तथा इस परंपरा के आदि पुरुष मीर अकासा की सांगीतिक विरासत के प्रमुख उत्तराधिकारी थे। वे तबला वादन की 33वीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जबकि उनके तीन पुत्र आरिफ खां, आसिफ खां और अमीन खां 34वीं पीढ़ी के कलाकार हैं।
उस्ताद साबिर खां के निधन से फर्रुखाबाद के कला प्रेमियों, साहित्यकारों और समाजसेवियों में गहरा शोक व्याप्त हो गया है और सभी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।






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