भोपाल, 20 मई ।
रेल मार्ग अब केवल यात्रियों की आवाजाही का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह नशा तस्करों के लिए एक सुरक्षित सप्लाई नेटवर्क के रूप में भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रेनों के जरिए गांजा तस्करी का यह संगठित नेटवर्क अब कई राज्यों तक फैल चुका है, जिसमें घरेलू सामान की आड़ में महिलाओं का भी इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचा जा सके।
जांच एजेंसियों के अनुसार पिछले 28 महीनों में ट्रेनों से जुड़े गांजा तस्करी मामलों में 87 महिलाओं की गिरफ्तारी हुई है। इनके पास से लगभग साढ़े सात क्विंटल गांजा बरामद किया गया, जिसकी कीमत 10 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। वहीं पिछले एक वर्ष में ही ट्रेनों के माध्यम से करीब 10 करोड़ रुपये मूल्य का गांजा पकड़ा गया, जिसमें 18 महिलाएं भी शामिल रही हैं। यह पूरा नेटवर्क मुख्य रूप से ओडिशा के कंधमाल, बौध और गंजाम जैसे नक्सल प्रभावित जिलों से संचालित बताया जा रहा है।
इसी क्रम में भोपाल में क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब मेल ट्रेन से गांजा लेकर आए सात तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनमें पांच महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से करीब 36 किलो अवैध गांजा बरामद किया है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग चार लाख रुपये बताई गई है।
आरोपी घरेलू सामान जैसे टोकरी, तगाड़ी, बाल्टी और झोलों में गांजा छिपाकर ला रहे थे ताकि किसी को शक न हो। पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ तस्कर ट्रेन से भोपाल पहुंचकर आउटर क्षेत्र में उतरने के बाद करारिया जंगल के रास्ते छोला इलाके में सप्लाई करने की योजना बना रहे हैं।
सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच और थाना बजरिया पुलिस ने स्टेशन क्षेत्र के पास कोच फैक्ट्री काली मंदिर के पास घेराबंदी कर सभी संदिग्धों को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उनके बैगों से ब्राउन टेप में लिपटे पैकेट मिले, जिनमें हरे रंग का पत्तीदार पदार्थ गांजा पाया गया।
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे बाहरी राज्यों से गांजा लाकर भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में सप्लाई करते थे। पुलिस ने आरोपियों से दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राहुल सौदा, रवि मेसकर, रचना सौदा, सीमा सौदा, निधि सौदा, काजल मेसकर और आरती ऊंटबार के रूप में हुई है। सभी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।






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