नई दिल्ली, 20 मई ।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल के निकट स्थित परीक्षण रेंज में मानव रहित हवाई वाहन से प्रक्षेपित की जाने वाली सटीक निर्देशित मिसाइल यूएलपीजीएम-वी3 के अंतिम विकास परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इस उपलब्धि के साथ भारत अब यूएवी के माध्यम से हवा से सतह और हवा से हवा दोनों प्रकार के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम हो गया है।
इन परीक्षणों के दौरान एकीकृत ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम के माध्यम से पूरी प्रणाली का संचालन किया गया, जिससे लक्ष्य निर्धारण, प्रक्षेपण और नियंत्रण प्रक्रियाएं अधिक सटीक और स्वचालित हो सकीं। इस तकनीक ने मिशन की दक्षता और सटीकता को और मजबूत किया है।
इस परियोजना में मिसाइल निर्माण और उत्पादन के लिए हैदराबाद स्थित भारत डायनामिक्स लिमिटेड तथा एक निजी रक्षा कंपनी के सहयोग से उत्पादन साझेदारी की गई है। परीक्षण के लिए इस प्रणाली को बेंगलुरु स्थित एक तकनीकी संस्थान द्वारा विकसित यूएवी में एकीकृत किया गया।
मिसाइल विकास के इस कार्य में हैदराबाद स्थित प्रमुख अनुसंधान केंद्र को नोडल प्रयोगशाला बनाया गया है, जबकि अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं जैसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला, टर्मिनल बैलिस्टिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला और उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला ने भी इसमें सहयोग दिया है।
रक्षा मंत्री ने इस सफलता पर डीआरडीओ और रक्षा उद्योग से जुड़े सभी संस्थानों को बधाई देते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली टैंक रोधी क्षमता के साथ-साथ ड्रोन, हेलीकॉप्टर और अन्य हवाई लक्ष्यों को भी भेदने में सक्षम है।
डीआरडीओ प्रमुख ने भी इस उपलब्धि में शामिल सभी टीमों के प्रयासों की सराहना की और इसे देश की रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति बताया।




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