भोपाल, 19 मई ।
मध्य प्रदेश की उर्टन और धीरौली कोयला खदानों में उत्पादन शुरू होने के साथ देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती देने की दिशा में अहम प्रगति दर्ज की गई है। कोयला मंत्रालय का मानना है कि इन परियोजनाओं से घरेलू कोयले की उपलब्धता में वृद्धि होगी और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को नई गति मिल सकेगी।
अनूपपुर जिले में स्थित उर्टन कोयला खदान का आवंटन जेएमएस माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड को किया गया है। इस खदान से 15 मई 2026 से उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। विशेष बात यह है कि वाणिज्यिक कोयला नीलामी व्यवस्था के अंतर्गत उत्पादन शुरू करने वाली उर्टन देश की पहली भूमिगत कोयला खदान बन गई है। इसे कोयला क्षेत्र में सुधार आधारित प्रयासों की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
इसी क्रम में सिंगरौली जिले की धीरौली कोयला खदान में भी उत्पादन शुरू हो गया है। इस खदान का आवंटन महान एनरजेन लिमिटेड को किया गया है। यहां 17 मई 2026 से कोयला उत्पादन आरंभ हुआ है। माना जा रहा है कि संसाधनों से समृद्ध सिंगरौली क्षेत्र से कोयले की आपूर्ति अब और सुदृढ़ होगी।
कोयला मंत्रालय के मुताबिक, दोनों खदानों में उत्पादन की शुरुआत प्रक्रियाओं के सरलीकरण और मंत्रालय की सुधारवादी नीतियों का परिणाम है। मंत्रालय का कहना है कि परिचालन क्षमता बढ़ाने और व्यापार को सरल बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों से घरेलू कोयले की मांग पूरी करने, आयात निर्भरता कम करने और आर्थिक विकास को गति देने में सहायता मिलेगी।






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