नई दिल्ली, 22 मई ।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने यमुना नदी में अवैध खनन से जुड़े मामले में पर्यावरणीय स्वीकृति और खनन पट्टा रद्द किए जाने की जांच के आदेश दिए हैं। शुक्रवार को “बिट्टू बनाम राज्य उत्तर प्रदेश एवं अन्य” मामले की सुनवाई के दौरान अधिकरण ने यह निर्देश जारी किए। मामला गाजियाबाद जिले की लोनी तहसील स्थित ग्राम पंचायत पनचायरा के यमुना नदी क्षेत्र में अवैध खनन, नदी की मुख्य धारा में खनन, रात्रिकालीन गतिविधियों, भारी मशीनों के इस्तेमाल और पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन से जुड़ा है।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी, न्यायिक सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने मामले में प्रस्तुत फोटो, वीडियो, शिकायतों और अन्य दस्तावेजों का अवलोकन किया। सुनवाई के दौरान अधिकरण ने माना कि रिकॉर्ड में पर्यावरणीय नियमों और खनन शर्तों के बार-बार उल्लंघन से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं।
अधिकरण ने उत्तर प्रदेश राज्य पर्यावरण प्रभाव आंकलन प्राधिकरण और गाजियाबाद जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि परियोजना संचालक को दी गई पर्यावरणीय स्वीकृति वापस लेने और खनन पट्टा निरस्त करने के मुद्दे पर जांच कर कानून के अनुसार निर्णय लिया जाए। इस प्रक्रिया में दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाएगा।
एनजीटी ने यह भी दर्ज किया कि परियोजना संचालक पर उत्तर प्रदेश माइनर मिनरल्स कन्सेशन नियमावली 2021 के तहत पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है, जिसे जमा भी कराया गया है।
अधिकरण ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में खनन की अनुमति दी जाती है तो परियोजना संचालक को पर्यावरणीय मंजूरी की सभी शर्तों, सस्टेनेबल सैंड माइनिंग मैनेजमेंट गाइडलाइंस 2016 और एनफोर्समेंट एंड मॉनिटरिंग गाइडलाइंस 2020 का सख्ती से पालन करना होगा। साथ ही केवल जीपीएस युक्त वाहनों के उपयोग और साप्ताहिक मॉनिटरिंग रिपोर्ट तथा सीसीटीवी फुटेज संबंधित विभागों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
ट्रिब्यूनल ने जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त और जिला खनन अधिकारी को अवैध खनन रोकने के लिए आकस्मिक निरीक्षण और कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई दो जुलाई 2026 को तय की गई है।




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