मेदिनीपुर, 12 मार्च।
गैस की कमी के कारण पश्चिम बंगाल के दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर में भक्तों के लिए तैयार किए जाने वाले भोग प्रसाद की मात्रा कम करने का निर्णय लिया गया है। अब प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्तों को प्रसाद देने के बजाय सीमित संख्या में ही भोग वितरण किया जाएगा।
मंदिर के मुख्य पुजारी और ट्रस्ट कमेटी के सदस्य राधारमण दास ने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन भगवान को भोग अर्पित करने के साथ-साथ भक्तों के लिए भी प्रसाद तैयार किया जाता है। मंदिर परिसर में बैठकर भोग ग्रहण करने की व्यवस्था शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या और मांग दोनों में वृद्धि हुई थी। पहले प्रतिदिन लगभग एक हजार भक्तों के लिए भोग प्रसाद बनाया जाता था।
उन्होंने बताया कि दिन में तीन बार भोग प्रसाद तैयार करने के लिए प्रतिदिन लगभग आठ से नौ गैस सिलेंडरों की आवश्यकता होती है। हालांकि भगवान के भोग के लिए गैस के साथ लकड़ी का भी उपयोग किया जाता है, लेकिन वर्तमान गैस संकट के कारण अब लगभग एक से डेढ़ हजार श्रद्धालुओं के बजाय केवल करीब 150 से 200 भक्तों को ही भोग प्रसाद देने का निर्णय लिया गया है।
मंदिर प्रशासन ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि भगवान के लिए तैयार होने वाले भोग में किसी प्रकार की कमी नहीं की जाएगी, लेकिन यदि गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं होती है तो भक्तों को मिलने वाले प्रसाद की मात्रा पर असर पड़ सकता है।
इस बीच पूर्व मेदिनीपुर जिले के कांथी-तीन ब्लॉक के नाचिंदा स्थित शीतला मंदिर में भी श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर देवी को भोग अर्पित करते हैं। यहां प्रतिदिन लगभग 500 लोगों के लिए भोग बनाया जाता है, जबकि शनिवार और मंगलवार को यह संख्या करीब ढाई हजार तक पहुंच जाती है।
मंदिर कमेटी के पूर्व सदस्य अमृतांशु प्रधान ने बताया कि यदि गैस की आपूर्ति में समस्या जारी रहती है तो पहले की तरह लकड़ी के उपयोग से ही भोग तैयार करने की व्यवस्था की जाएगी।
वहीं दीघा के पास स्थित प्राचीन नयाकाली मंदिर में माता काली को मुख्य रूप से खीर का भोग लगाया जाता है, जिसकी व्यवस्था भक्त स्वयं करते हैं। इसलिए वहां फिलहाल किसी प्रकार की परेशानी की संभावना नहीं जताई जा रही है।












