यह कथा समय और मानवीय स्वभाव का गहरा पाठ देती है। इसमें अन्धा, लंगड़ा, निर्धन, मूर्ख और निर्बल व्यक्ति अपनी कमियों के कारण सोचते हैं कि यदि उन्हें शक्ति, धन, विद्या या स्वास्थ्य मिलता तो वे दूसरों की भलाई के लिए काम करते। समय ने उन्हें वह सब दे दिया, लेकिन वे अपने स्वार्थ में लीन हो गए और अपने पूर्व के परोपकारी संकल्प भूल गए। अंततः सबकुछ पूर्ववत लौट आया और उन्हें पछतावा हुआ। कहानी हमें यह संदेश देती है कि हमारे पास जो कुछ भी है—स्वास्थ्य, शक्ति, विद्या या धन—उसका सही उपयोग समाज और जरूरतमंदों की भलाई में करना चाहिए, क्योंकि वास्तविक सुख और मूल्य दूसरों की सेवा में निहित है।
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