जम्मू, 26 मार्च।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार के लिए एक नए नीति प्रस्ताव को विधानसभा में पेश करने की तैयारी शुरू कर दी है। यह कदम पीडीपी विधायक वहीद-उर-रहमान पारा के सुझाव पर उठाया गया है, जिन्होंने एक निजी सदस्य प्रस्ताव के माध्यम से प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर प्रबंधन की मांग की थी।
आधिकारिक आदेश के अनुसार उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने “जम्मू-कश्मीर शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार विधेयक, 2026” को विधानसभा में पेश करने और उस पर विचार करने की मंजूरी दी है। प्रस्तावित विधेयक में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नए स्कूल, कॉलेज और स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करने का प्रावधान शामिल है।
विधेयक में प्रत्येक जिले और ब्लॉक के लिए विशेष प्रशासनिक इकाइयों का गठन करने का सुझाव दिया गया है, जिससे संसाधनों का प्रभावी वितरण और बेहतर निगरानी सुनिश्चित की जा सके। इसमें स्वास्थ्य केंद्रों और शैक्षिक संस्थानों के लिए समर्पित प्रबंधन और बजट प्रावधान भी शामिल हैं।
प्रस्तावित मसौदे के अनुसार नीति का उद्देश्य दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना, सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन को प्रभावी बनाना और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना है। सरकार को अधिकार होगा कि अधिसूचनाओं के माध्यम से विभिन्न जिलों और ब्लॉकों में शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का समुचित वितरण सुनिश्चित किया जाए।
विधानसभा का बजट सत्र 27 मार्च से पुनः शुरू होगा और 4 अप्रैल तक चलेगा। सत्र में निजी सदस्यों के प्रस्तावों और विधेयकों पर चर्चा के लिए 30 मार्च, 31 मार्च और 1–2 अप्रैल की तारीखें आरक्षित हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पहले चरण में बजट प्रस्तुत किया था, और सदन ने विभागों के लिए अनुदान पारित किए थे।











